slov za minutu

22

SHRAVAN_KUMAR_YADAV


00:00

Rychlost

योध्या के भूपति श्री दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र श्री रामचन्द्र जी ने रावण से घमासान युद्ध में उसकी नाभि में अमृत का भेद ज्ञात हो जाने पर झटपट रथ पर चढ़कर अपने प्रचण्ड बाणों का उसकी नाभि पर ऐसा प्रहार किया जिससे कुछ ही क्षणों में उसके प्राण पखेरू हो गए। ऋषियों का कहना है कि ऐसा विद्यावान मनुष्य अर्थात रावण की प्रकृति वाला व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता इसलिए मनुष्य को कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए।
slov za minutu
0
wpm
Přesnost
0%
Procvičování textů - Čas 124 - English

slov za minutu