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वादी का वाद संक्षेप में इस प्रकार है कि वादी स्व.श्री लक्ष्मण प्रसाद मोहिले का पुत्र होकर वर्तमान में 207 कुर्जन नगर फेस-1 होशंगाबाद रोड भोपाल में निवास कर रहा है। वादी इससे पूर्व इ्र-5/158 अरेरा कालोनी भोपाल में अपने परिवार के सदस्यों के साथ निवास करता था। वादी का एक भाई रामप्रकाश शर्मा आत्मज स्व. श्री लक्ष्मण प्रसाद मोहिले भी वादी के साथ ही निवास करता था। श्री रामप्रकाश शर्मा अविवाहित होकर नि:संतान थे। दिनांक 03.10.2005 को शाम को 5 बजे श्री रामप्रकाश शर्म परिवार के अन्य सदस्यों को बताये बिन घर से चले गये। परिवार के सदस्यों द्वारा देर रात तक श्रीराम प्रकाश शर्मा के वापिस लौटने का इंतजार करते रहे थे। देर रात तक वापिस नहीं आने पर वादी के द्वारा पुलिस थाना हबीबगंज में रिपोर्ट लिखाने के लिये जाने पर पुलिस अधिकारियों के द्वारा नियमानुसार श्री राम प्रकाश के पापिस लौटने की सलाह दी गई तथा 48 घंटे के बाद समाचार पत्र में समाचार के प्रकाशन के बाद प्राथमिक दर्ज करने को कहा गया। स्थानीय पुलिस अधिकारितयों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार वादी तथा उसके परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा अपने स्तर पर श्रीराम प्रकाश शर्मा को खोजने का प्रयास किया परन्तु असफलता मिलने पर वादी ने दिनांक 7.10.2005 को प्राप्त: 11 बजे पुलिस थाना हबीबगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई।वादी का वाद आगे संक्षेप में इस प्रकार है कि पुलिस थाना हबीबगंज से रिपोर्ट दर्ज कराने के पूर्व दिनांक 6.10.2005 को श्री राम प्रकाश शर्मा के गुमशुदा होने के स्थानीय दैनिक भास्कर समाचार पत्र में प्रकाशन हेतु दिया जो दिनांक 7.10.2005 को भोपाल संस्करण में प्रकाशित किया गया1 समाचार पत्र में प्रकाशन के उपरांत पुलिस एवं परिवार के सदस्यों द्वारा प्रयास करने के बाद भी आज दिनांक तक श्री राम प्रकाश शर्मा का न कोई पता चला और न ही वह वापिस लौटे। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 108 के प्रावधानों तथा प्राकृतिक न्याय सिद्धान्तों के अनुसार जब गुमशुदा व्यक्ति सात वर्ष तक वापिस लौटकर नहीं आता है तो या उसका कोई पता नहीं चलता है तो यह माना जाना चाहिये कि वह मृत हो चुका है। अभियुक्त के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 379, 201 के तहत आरोप है कि, उसने दिनांक 20.01.2021 को समय लगभग 7:14 बजे से समय 7:16 बजे के मध्य थाना जीआरपी भोपाल क्षेत्रान्तर्गत स्थान रनिंग ट्रेन क्रमांक जयपुर चैन्नई एक्सप्रेस के कोच शेविंग किट, कुल कीमती 4000/- रूपये को फरियादी की सहमति के बिना सदोष अभिलाभ प्राप्त करने के लिये बेईमानीपूर्ण आशय से हटाकर/ले जाकर चोरी कारित की तथा उक्त घटना, दिनांक, समय व स्थान पर या उसके आसपास जानते हुये अथवा विश्वास का कारण होते हुये कि एक अपराध चोरी जो दस वर्ष से कम कारावास के दंड से दंडनीय है, घटित हुआ है के वैधानिक दंड से बचने के आशय से फरियादी के पिट्ठू बैग मय सामान के फेंककर उस अपराध की साक्ष्य को विलोपित किया। प्रकरण में निर्विवादित तथ्य है कि उभयपक्ष के मध्य राजीनामा होने से आदेश पत्रिका दिनांकित 30.06.2026 के अनुसार अभियुक्त को धारा 379 भारतीय दण्ड विधान के अपराध से दोषमुक्त किया गया है। अभियोजन प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि, एसआरई व्ही पी उईके थाना जीआरपी भोपाल में एसआई के पद पर पदस्थ थे दिनांक 21.01.2021 को सुबह 08 बजे से शाम के 08 बजे तक डयटी थी। दौराने डयूटी थाना इन्चार्ज के आदेश थाना जीआरपी हबीबगंज के अपराध क्रमांक 7/21 धारा 380 की शून्य की डायरी असल अपराध कायमी हेतु प्राप्त हुयी जिसके अनुसार दिनांक 19.01.2021 को फरियादी रमेश शर्मा ट्रेन जयपुर चैन्नई एक्स के कोच एस 1 बर्थ नं 9 पर जयपुर से सेलम की यात्रा कर रहा था यात्रा के दौरान भोपाल स्टेशन के पूर्व फरियादी का पिट्ठू बैग जिसके अंदर नगरी 4000 रूपये एवं पहनने के कपडे शेविंग किट भी था कोई अज्ञात व्यक्ति चोरी कर ले गया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 जिसे एतस्मिनपश्चात अधिनियम 1988 से संबोधित किया जाएगा की धारा 13 सहपठित धारा के अनतर्गत दण्डनीय अपराध का आरोप है, कि अभियुक्त परमलाल अहिवासी ने दिनांक से दिनांक तक और अभियुक्त साधना अहिवासी ने दिनांक 11.02.2010 से दिनांक 09.10.2012 तक ग्राम पंचायत सुनाचर, जनपद पंचायत शहपुरा, जिला जबलपुर मध्यप्रदेश के सरपंच पद पर लोकसेवक के रूप में पदस्थ रहते हुए जांच अवधि के मध्य आय के ज्ञात स्रोतों से 1670509/- रूपये मूल्य के अनानुपातिक धन सम्बधी साधन तथा सम्पत्ति अपने आधिपत्य में रखी। प्रकरण में यह तथ्य अविवादित है, कि अभियुक्त परमलाल अहिवासी एवं अभियुक्त साधना अहिवासी आपस में पति-पत्नी हैं। यह तथ्य भी अभियुक्तगण की ओर से स्वीकार किया गया है, कि अभियुकत परमलाल अहिवासी दिनांक 01.01.2005 से 10.02.2010 तक और अभियुकत साधना अहिवासी दिनांक 11.2.2010 से दिनांक 9.10.12 तक ग्राम सुनाचर के सरपंच पद पर पदस्थ रहे हैं। मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 111 के प्रावधानों के अनुसार अभियुक्तगण उक्त अवधि में ग्राम पंचायत-सुनाचर के सरपंच पद पर पदस्थ रहते हुए लोकसेवक थे। अभियुक्तगण ने अपने परिवार के सदस्यों की जानकारी को भी स्वीकार किया हे, जिसके अनुसार अभियुक्त परमलाल अहिवासी के पिता की मृत्यु वर्ष 2001 में हो चुकी है तथा उसकी माता का नाम कोमलबाई है। इसके अतिरिक्त अभियुक्त परमलाल अहिवासी के तीन भाई दौलत अहिवासी, प्रहलाद अहिवासी एवं विनोद अहिवासी हैं और अभियुक्तगण का एक पुत्र विनीत तथा दो पुत्रियां विनीता एवं आस्था हैं। अभियोजन कथानक संक्षेप में इस प्रकार है, कि दिनांक 27.12.11 को ग्राम पंचायत सुनाचर, जिला जबलपुर के ग्रामवासियों के नाम से अभियुक्तगण के विरूद्ध मध्यप्रदेश लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त (अन्वेषण) नियम, 1982 के नियम 6 के अन्तर्गत इस आशय की एक शिकायत दिनांक 19.12.2011 प्राप्त हुई, कि वर्ष 2005 में अभियुक्तगण के सरपंच निर्वाचित होने के पूर्व अभियुक्तगण के स्वामित्व की 16 एकड़ कृषि भूमि जिस पर बैलों द्वारा कृषि कार्य किया जाता था, एक कच्चा मकान और एक पुरानी मोटर साईकिल राजदूत थे।