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Darsh_KEWAT


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Hraði

11.8.26 माननीय उच्‍च न्‍यायालय के आदेशानुसार उक्‍त राशि संपूर्ण ब्‍याज सहित प्राप्‍त कर ली है, किन्‍तु फिर भी उसके विरूद्ध हरिनारायण सेन द्वारा यह झूठा प्रकरण पंजीबद्ध कराया गया। वह निर्दोष है। बचाव पक्ष द्वारा लिये गये उक्‍त बचाव साक्ष्‍य के समर्थन में उसके द्वारा गौरव सिंह मारण वाले प्रकरण में समझौता धारा 147 परक्राम्‍य लिखत का आवेदन प्र.डी.-1 समझौता पत्र जो कि प्र0डी0-02 है, शासन विरूद्ध धर्मेन्‍द्र सेंगर, एस.टी. क्रमांक 865/2021 की आदेश पत्रिका प्र0डी0-3 एवं उसके द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय की एमसीआरसी नंबर 34162/2021 आदेश दिनांक का आदेश, उसके द्वारा माननीय न्‍यायालय के समक्ष माननीय मुख्‍य न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी महोदय भोपाल के समक्ष विचाराधीन आपराधिक प्रकरण क्रमांक 6134/2021, की आदेश पत्रिका दिनांक 7/6/2023 जिसमें हरिनारायण सेन द्वारा गौरव मारण, नीतेश साहू से 30 लाख रुपये प्राप्‍त करने की अभिस्‍वीकृति, जिसके से भाग पर परिवादी द्वारा गोरव मारण एवं नीतेश साहू से 30 लाख रुपये प्राप्‍त कर हस्‍ताक्षर किये है प्र0डी0-04, उक्‍त प्रकरण में हरिनारायण का अधिवक्‍ता द्वारा प्रतिपरीक्षण किया गया था, उक्‍त प्रतिपरीक्षण की प्रति प्र0डी0-06 के दस्‍तावेज पेश किये गये है। उक्‍त संबंध में यदि तर्क के लिए मान भी लिया जावे कि अभियुक्‍त का परिवादी से कोई लेन-देन शेष नहीं है उक्‍त भूखंड के संबंध में ली गई संपूर्ण राशि गौरव मारण नीतेश साहू ने दे दी हो उसका कोई लेन-देन शेष रहा हो तो यदि वास्‍तव में उक्‍त भूखण्‍ड के संबंध में कोई राशि का लेन-देन शेष रहा होता तो बचाव पक्ष को उक्‍त संबंध में परिवादी के विरूद्ध संबंधित थाने या संबंधित अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत कर कार्यवाही की जानी चाहिए थी, किंतु तत्‍संबंध में कोई भी दस्‍तावेज अभिलेख पर नहीं है। यद्यपि प्र0डी0-01 लगायत 06 के दस्‍तावेज प्रस्‍तुत किये गये हैं किंतु उक्‍त दस्‍तावेजों में कहीं भी ऐसा दर्शित नहीं होता है कि अभियुक्‍त का परिवादी से कोई लेन-देन शेष रहा हो अभियुक्‍त द्वारा उक्‍त प्र0पी0-01 के प्रश्‍नगत चेक की राशि की अदायगी परिवादी को कर दी हो।
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Textaæfing - Tími 483 - English

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