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Darsh_KEWAT
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भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के अधीन 10 वर्ष के कठोर कारावास से रुपये 20 हजार रुपये के साथ जुर्माने के साथ दोषसिद्धि किया गया है जुर्माना संदत्त करने में हुई असफलता की स्थिति में उसे सत्र विचारण संख्या को अपर सत्र न्यायाधीश, बलौदा बाजार जिला द्वारा यथा यथिष्ट कठोर कारावास भुगतना अक्षेपित था मर्ग (प्रदर्श पी 7) 1 बजे मृतिका लेखेसरी बाई के पति अपीलार्थी के कथन पर अभिलिखित किया गया था जिसमें यह अभिकथित किया गया था कि वह एक कृषक है। पिछले रात्रि में उसका अपने पत्नी के साथ खड़ी हुई फसल के संबंध में मौखिक वाद-विवादहुआ था। रात्रि के भोजन के बाद वह रात्रि में फसल की देख-रेख के लिए खेतों पर चला गया था। उसकी पत्नी घर में अकेली थी। वह लगभग 4 बजे घर आया और देखा की उसकी पत्नी अपने गर्दन के ओर चोरों साडी से बांधकर स्वयं को लटका लिया था और उसके पैर जमीन पर थे। उसने उसे जमीन पर लिटा दिया और पाया कि अभी भी श्वास ले रही थी उसने पांच-छ: मिनिट बाद ही श्वास लेना बंद कर दिया था। उसके बाद वह कोटवार के पास गया था उसे एवं अन्य लोगों को बुला लिया। जिसके बाद ने मर्ग दर्ज कराया। उसके द्वारा प्रथम सूचना रिपोूर्ट प्रदर्श पी 8 उसी के आधार पर पंजीकृत की गयी थी। मृतिका का परीक्षण अभिसाक्ष्य 1 द्वारा किया गया था रिपोर्ट में यह अधिकथित किया गया था कि जबड़ा के सीध में सीधा खुट्टी के नीचे टेटों के रूप में गर्दन के फांसी के फंदे का निशान मौजूद था फांसी के फंदे का निशान बैवधानित था आंखें बंद थी नेत्र साकुंचित था सफेद झाग मुंह पर मौजूद चेहरा एवं गर्दन का निचला हिस्सा संकुचित गर्भाश्वय में पांच माह भ्रूण था शरीर पर राय व्यक्त करने वाली कोर्ठ अन्य उपहति नहीं थी मृतिका फांसी लगाने से हुई श्वासावरोध ने कारण हुई थी, मृत्यु प्राकृतिक आत्म घातक थीउच्च समिति से नामित होने पर प्रतिनिधित करने वाले श्री हरप्रीति ने तर्क दिया कि इस प्रभाव का कोई साक्ष्य नहीं है कि अपीलार्थी का आचारण अपीलार्थी आत्महत्या करने का दुष्प्रेरण करने की कोटि में आता था। अभियुक्त को निर्णय की कंडिका 1 में वर्णित अपराध की विशिष्टियां पढकर सुनाये व समझाये जाने पर अभियुक्त ने अपराध किया जाना अस्वीकार किया। प्रकरण अभियोजन साक्ष्य हेतु नियत किया गया, लेकिन अभियोजन साक्ष्य के स्तर पर अभियुक्त द्वारा संपूर्ण अभियोजन कार्यवाही को स्वीकार किया जिस कारण अभियुक्त परीक्षण नहीं किया गया। अभियुक्तगण पर धारा सपठित धारा 34 दो शीर्ष, 325 विकल्प में 325 सपठित धारा 34 एवं 506 तीन शीर्ष भा.दं.सं. के अंतर्गत आरोप है कि उन्होंने रात्रि या उसके लगभग 126 शंकर नगर थाना छोला मंदिर भोपाल परिक्षेत्र में फरियादी संजू श्रीवास्वत के मानव निवास हेतु प्रयुक्त भवन में डण्डा, लोहे की रॉड एवं फावड़ा से लैस होकर उपहति कारित करने की तैयारी करके प्रवेश करके गृह अतिचार किया तथा लोकस्थान या उसके समीप अश्लील गालियां देकर फरियादी संजू श्रीवास्तव, नितिन एवं नितेश को क्षोभ कारित किया एवं डण्डा, रॉड व फावड़ा से फरियादी संजू श्रीवास्तव एवं नितेश को स्वेच्छया उपहति कारित की तथा नितिन की बांयी अलना में अस्थिभंग कर स्वेच्छया घोर उपहति कारित की विकल्प में सामान्य आशय के अग्रसरण में डण्डा, रॉड व फावडा से नितिन की बांयी अलना में अस्थिभंग कर स्वेच्छया घोर उपहति कारित की एवं फरियादी संजू श्रीवास्तव, नितिन एवं नितेश को संत्रास कारित करने के आशय से मृत्यु कारित करने की धमकी देकर आपरािधक अभित्रास कारित किया। प्रकरण में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि विचारण के दौरान फरियादी एवं आहतगण संजू श्रीवास्तव द्वारा रानीनामा पेश करने पर अभियुक्तगण सहपठित 34, एवं 506 (03-शीर्ष) भा.दं.सं. राजीनामा योग्य होने से उसके संबंध में आवेदन निरस्त कर विचारण जारी रखा गया। अभियोजन का प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि फरियादी अभियोजन का प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि फरियादी अभियोजन का प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि फरियादी संजू श्रीवास्तव पुलिस थाना छोला मंदिर, भोपाल संजू श्रीवास्तव ने पुलिस थाना छोला मंदिर, भोपाल में इस आशय की रिपोर्ट लेख करायी इस आशय की रिपोर्ट लेख करायी। कि अभियुक्तगण को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर दण्डाधिकारीगण मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर उचित न्याय करके उन्हें जेल तत्कालीन भेजा जाये। ताकि इस प्रकार की घटना को दोबारा अंजाम न दे पाएं। अपीलार्थी/अभियुक्त की ओर से यह अपील न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आगर मालवा श्री हेमंत मेहरा के न्यायालय के आपराधिक प्रकरण क्रमांक- राज्य वि. जसोदाबाई में घोषित निर्णय (संक्षेप में आलोच्य निर्णय) से व्यथित होकर प्रस्तुत की गई है। आलोच्य निर्णय के अनुसार अपीलार्थी/अभियुक्त को भा.द.सं. की के अधीन दोषसिद्ध ठहराते हुए धारा 325 के अधीन 06 माह के सश्रम कारावास 1000/- रूपये अर्थदण्ड (अर्थदण्ड के व्यतिक्रम में 07 दिवस के अतिरिक्त सश्रम कारावास) से दंडित किया गया है। विचारण न्यायालय के अभिलेख अनुसार फरियादी कन्हैयालाल द्वारा थाना आगर पर इस आशय की रिपोर्ट लिखवायी गयी कि घटना को उसके घर के निकट अभियुक्त जसोदाबाई एवं उसकी बहन लालूबाई आपस में लड़ाई-झगड़ा कर रहे थे, उसके द्वारा बीच बचाव का प्रयास किया गया। तभी अभियुक्त जसोदाबाई ने उसे धक्का दिया, जिससे वह गिर गया और उसे जांघ व कूल्हे पर चोट आयी। फरियादी की रिपोर्ट के आधार पर थाना आगर पर अपराध क्रमांक-83/2023 पंजीबद्ध किया गया। आहत का एक्सरे परीक्षण कराया गया, जिसमें उसे अस्थिभंग होना पाया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र विचारण हेतु न्यायालय में पेश किया गया। विचारण न्यायालय द्वारा अभियुक्त/अपीलार्थी यशौदा बाई के विरूद्ध भा.द.सं. की के अधीन आरोप विरचित किए गए। अभियुक्त की ओर से उक्त आरोप अस्वीकार किए गए। विद्वान विचारण न्यायालय द्वारा प्रकरण का गुण-दोष के आधार पर निराकरण करते हुए आलोच्य निर्णय द्वारा अभियुक्त/अपीलार्थी को भा.द.सं. की धारा 294, 506(भाग-2) के आरोप से दोषमुक्त किया गया तथा धारा 323, 325 भा.द.सं. के अधीन दोषसिद्ध ठहराते हुए धारा 325 के अधीन 06 माह के सश्रम कारावास, 1000/- रूपये अर्थदण्ड (अर्थदण्ड के व्यतिक्रम में 07 दिवस के अतिरिक्त सश्रम कारावास) से दंडित किया गया है। दोषसिद्धि के उक्त निर्णय से व्यथित होकर अभियुक्त की ओर से वर्तमान अपील प्रस्तुत की गई है। अपीलार्थी की ओर से वर्तमान अपील में मुख्य रूप से यह आधार लिया गया है कि अभियोजन अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा है।