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DheerajDave
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डी.एन.ए. की संरचना के सह आविष्कारक प्रख्यात् नोबल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक जेम्स वाटसन अपनी उस आलोचना के लिए भी जाने जाते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अफ्रीकी भूल के लोग कम बुद्धिमान होते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अफ्रीकी मूल के लोग कम बुद्धिमान होते हैं। अपनी इस टिप्पणी के व्यापक विरोध स्वरूप उन्हें कोल्ड स्प्रिंग हार्वर प्रयोगशाला, न्यूयॉर्क स्टेट के कुलाधिपति का पद, लगातार 39 वर्षो तक बने रहने के पश्चात् छोड़ना पड़ा था। विडम्बना देखिये कि जब दिसम्बर 2007 में उनके डी.एन.ए. के जेनेटिक परीक्षणों के परिणाम सामने आये तो उनमें से 16 जीन अफ्रीकी पूर्वजों से आये थे, जबकि यूरोपीय समुदाय में ऐसे जीन की संख्या सामान्यतया एक से अधिक नहीं पायी जाती। यह लगभग ऐसा ही था कि जैसे कि उनके परदादा अफ्रीकी रहे हों।
बयान जोसफ लुसियाना में रहने वाले अश्वेत अमरीकी हैं। प्रसिद्ध पत्रिका 'न्यूज वीक' में उन्होंने अश्वेत लोगों के प्रतिनिधि के रूप में उनकी समस्याओं पर लेख भी लिखे। उनका मानना था कि वो 70 प्रतिशत अफ्रीकी हैं तथा माता-पिता के वंशों में संकरण के कारण हो सकता है कि वो 30 प्रतिशत किसी और नस्ल के हों। लेकिन जब उन्होंने अपना जेनेटिक टेस्ट करवाया तो उन्हें बताया गया कि वो 57 प्रतिशत भारतीय यूरोपिय, 39 प्रतिशत मूल अमरीकी तथा 4 प्रतिशत पूर्वी एशियाई हैं। उनमें अफ्रीकी रक्त तो बिलकुल ही नहीं है। यह एक उदाहरण है कि ऊपरी साज-सज्जा सही पहचान नहीं हो सकती। यदि हमारी पहचान माता-पिता के वंशों के आधार पर की जाए तथा समय सीमा को लगभग दो लाख वर्षो पीछे ले जायें तो, अब लगभग सभी वैज्ञानिक मानने लगे हैं, कि संपूर्ण मानव समुदाय एक ही परिवार का सदस्य है। आधुनिक मानव की शुरूआत अफ्रीकी महाद्वीप में हुई तथा उन लोगों के अवशेष दक्षिणी अफ्रीका के सैन लोगों तथा मध्य अफ्रीका के वियाका पिगमी लोगों में, जो उनके सीधे वंशज हैं, अब भी शेष हैं।