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SUDHAKARRAI
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एक बार की बात है बहुत जोरो कि बारिश हो रही थीं । तालाब मे मेंडक टर्र टर्र कि आवाज कर रहे थे ।
आसमान मे बिजली जोरो से कडक रही थी । अचानक मैं वहा से निकल रहा था और मैने देखा कि कुछ लोग वारिश मे फसें हुए है । और वो वचाव – वचाव की आवाज लगा रहे थे । फिर मुझसे रहा न गया , और मैने पास के झोपड़े से कुछ लोगो को उठाया और उनकी सहायता से फसे हुए लोगो की मदद की ।
एक गॉव मे एक बुड़िया नदी के किनारे झोपड़ी मे रहा करती थी । उस नदी के किनारे कुछ लोग शिकार की तालाश मे आया करते थे । उस ग़ॉव मे एक कुत्तो का झुन्ड बहुत ज्यादा सक्रिय था ।
एक रात शिकारियो ने बुड़िया को मारकर उसका सामान हथियाने कि योजना वनायी परन्तु कुत्तो के वहॉ सक्रिय रहने के कारण वे अपने मकसद मे कामयाब नहीं हो पाये तत्पश्चात वो वहा से चले गये ।
मोहन वचपन से सुरो का बहुत ज्यादा शाकीन था , उसके दादा जी ने उसको एक हरमोनियम और एक गिटार लाकर दिया । वह दिन रात संगीत की दुनिया मे खोया रहता । खाना खाते पर संगीत और सोते पर संगीत ।
वह दिन रात वस - सा रे गा मा पा धा नि सा – कि रट लगाये रहता । उसकी इन हरकतो के कारण उस सोशायटी के लोग बहुत दुखी रहा करते थे ।
नोट – ये गाधांश मात्र एक कल्पना है , इसका वास्तविक जीवन से कोई सम्बन्ध नही है
और अगर ऐसा पाया जाता है तो इसे मात्र सहयोग कहा जायेगा ।