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मानव के सामाजिक जीवन को भोगोलिक पर्यावरण के समान सांस्कृतिक पर्यावरण भी प्रभावित करता है। संस्कृति के सहारे ही मानव ने प्रकृति को अपने वश में किया है और भौगोलिक पर्यावरण को अपने अनुकूल बनाने में सफल हुआ है। पग-पग पर सांस्कृतिक पर्यावरण मानव क्रिया-कलापों को प्रभावित करता है। प्रकृति द्वारा प्रदत्त वस्तुओं को मानव फर्नीचर तथा हजारों प्रकार की वस्तुएँ बनाने के काम में लाता है जो कि उसके सांस्कृतिक पर्यावरण का अंग बन जाती है।
मानव जन्म से कुछ शारीरिक गुण एवं क्षमताएँ लेकर पैदा होता है, किन्तु संस्कृति लेकर नहीं। सांस्कृतिक पर्यावरण में ही मानव के गुणों व क्षमता का विकास होता है। समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति को समाज व संस्कृति की अनेक बातें सिखायी जाती हैं।