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SUDHAKARRAI


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ावनगर के राजा एक बार गर्मियों के दिनों में अपने आम के बागों में आराम कर रहे थे और वह बहुत ही खुश थे की उनके बागों में बहुत अच्छे आम लगे थे और ऐसे ही वो अपने खयालों में खोये हुए थे । तब वहाँ से एक ग़रीब किसान गुज़र रहा था और वह बहुत भूखा था, उसका परिवार पिछले दो दिन से भूखा था तो उसने देखा की क्या मस्त आम लगे है अगर मैं यहाँ से कुछ आम तोड़ कर ले जाऊँ तो मेरे परिवार के खाने का बंदोबस्त हो जाएगा । यह सोच कर वह उस बाग़ में घुस गया उसे पता नहीं था की इस बाग़ में भावनगर के राजा आराम कर रहे हैंवो तो चोरी छुपे घुसते ही एक पत्थर उठा कर आम के पेड़ पे लगा दिया और वह पत्थर आम के पेड़ से टकराकर सीधा राजाजी के सर पे लगा । राजाजी का पूरा सर खून से लत पथ हो गया और वो अचानक हुए हमले से अचंभित थे और उन्हें यह समझ ही नहीं रहा था की आखिर उनपर हमला किसने किया । राजा ने अपने सिपाहियों को आवाज़ दी तो सारे सिपाही दोड़े चले आयें और राजाजी का यह हाल देख उन्हें लगा की किसी ने राजाजी पे हमला किया है तो वह बागीचे के चारों तरफ आरोपी को ढूढ़ने लगे । इस शोर शराबे को देखकर ग़रीब किसान समझ गया की कुछ गड़बड़ हो गई वो डर के मारे भागने लगा, सिपाहियों ने जैसे ही इस ग़रीब किसान को भागते देखा तो वह सब भी उसके पीछे भागने लगे और उसे दबोच लिया । इस ग़रीब किसान को सिपाहियों ने पकड़कर कारागार में दाल दिया और उसको दूसरे दिन दरबार में पेश किया, दरबार पूरा भरा हुआ था और सबको यह मालूम हो चुका था की इस इंसान ने राजाजी को पत्थर मार था, सब बहुत गुस्से में थे और सोच रहे थे की इस गुनाह के लिए उसे मृत्युदंड मिलना चाहिए । सिपाहियों ने इस ग़रीब किसान को दरबार में पेश किया और राजा ने उससे सवाल किया की तू ने मुझ पर हमला क्यों किया? ग़रीब किसान डरते डरते बोला माई बाप मैंने आप पर हमला नहीं किया है मैं तो सिर्फ आम लेने आया था मैं और मेरा परिवार पिछले दो दिनों से भूखे थे इस लिए मुझे लगा की अगर यहाँ से कुछ फल मिल जाए तो मेरे परिवार की भूख मिट सकेगी । यह सोचकर मैंने वह पत्थर आम के पेड़ को मार था मुझे पता नहीं था की आप उस पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और वह पत्थर आपको लग गया । यह सुनकर सभी दरबारी बोलने लगे अरे मूर्ख तुझे पता है तू ने कितनी बड़ी भूल करी है तू ने इतने बड़े राजा के सर पे पत्थर मारा है अब देख क्या हाल होता है तेरा । राजाजी ने सभी दरबारीयों को शांत रहने को कहा और वह बोले भला अगर एक पेड़ को कोई पत्थर मरता है और वह फल दे सकता है तो मैं तो भावनगर का राजा हूँ मैं इसे दंड कैसे दे सकता हूँ
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