words per minute
8
user1120697
00:00
Speed
रोजगार व्यक्ति की आधारभूत आवश्यकता है, ईश्वर ने हमें मस्तिष्क और हाथ और पाँव, दिमाग की अनेक शक्तियाँ, दिल और भावना प्रदान की हैं जिससे कि उनका सदुपयोग किया जा सके और मनुष्य आत्म-सिद्धि प्राप्त कर सके । शायद हमारे जीवन का यही लक्ष्य हो । किन्तु यदि हमारे पास करने को कोई काम ही नहीं है, यदि ऊपर वर्णित शक्तियों के प्रयोग करना के लिए हमारे पास अवसर ही नहीं है तो बहुत सी समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं । प्रथम, हम अपनी शारीरिक और मानसिक आवश्कताओं की पूर्ति नहीं कर सकते । द्वितीय, कार्य की अनुपस्थिति में हमें शरारत करना आयेगा । इस प्रकार ऐसे समाज में, जिसमे रोजगार की समस्या जटिल है, उसमें निराशा, अपराध और अविकसित व्यक्तित्व होंगे ।
भारत लगभग इसी प्रकार की परिस्थिति से गुजर रहा है । यहाँ बेरोजगारी की समस्या बहुत जटिल हो गयी है । हमारे रोजगार कार्यालयों में करोड़ों लोग पंजीकृत हैं जिनको काम दिया जाना है, इनके अतिरिक्त, ऐसे भी व्यक्ति हैं, और उनकी संख्या भी लाखों में है, जो कि अपने को रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत ही नहीं करा पाते ।
भारत में बेरोजगारी की समस्या के कई कारण हैं, पहला कारण है तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या, सरकार जिस अनुपात में जनसंख्या बढ़ती है उस अनुपात में नौकरियों का सृजन नही कर पाती,द्वितीय, हमारी दूषित शिक्षा व्यवस्था ने भी समस्या को उलझा दिया है, जबकि लाखों की तादाद में लोग रोजगार की तलाश कर रहे हैं, वहीं बहुत से उद्योग, और संस्थाएँ ईसी हैं जहाँ पर उपयुक्त कार्य करने वालों की बहुत कमी है । हम रोजगार परक शिक्षा को प्रारम्भ नहीं कर पाये हैं और न उद्योग के साथ शिक्षा का तालमेल ही बैठा पाये हैं । बेरोजगारी का एक अन्य कारण अपर्याप्त औद्योगीकरण और कुटीर उद्योग-धन्धे की मंद प्रोत्साहन नहीं मिल पाता । हमारे बेरोजगार युवकों का सफेद पोश नौकरी के लिए प्रेम भी बेरोजगारीका एक अन्य कारण है । हमारे नौजवान नियमित नौकरी की तलाश में अपनी शक्ति एवं संसाधन खर्च कर देगें । किन्तु अपना कारोबार प्रारम्भ नहीं करेंगे, यहाँ कर कि एक कृषि स्नातक भी खेतों में कार्य नहीं करेगा ।बल्कि कृषि संस्थानों में सरकारी नौकरी में उपयुक्त पद के लिए प्रतीक्षा करेगा । वास्तव में हमारे नवयुवकों का भी दोष नहीं । अपने कारोबार में विनियोग करने के लिए उनके पास पर्याप्त साधन एवं पूंजी नहीं है ।