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SudhanshuSharma
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यह अजीब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मोदी को फोन किया तो हम खुश हो गये, जबकि उनका देश 1999 से ही मसूद अजहर की हिफाजत कर रहा है। पठानकोट में भारतीय वायुसेना के बेस पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले ने यही दिखाया है कि हमारा दुश्मन बहुत ढीठ है। वह हमारे क्षेत्र में बार – बार घुस आता है, कई दिनों तक लड़ता है और हमारे सैनिकों की हत्या करता है। भारत दुश्मन के इलाके पर नहीं अपनी ही भूमि पर लड़ाई लड़ने पर मजबूर होता है। हर हमले के बाद हमारी ओर से कहा जाता है - हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। भारत दुश्मन के हमले के लिए इंतजार करता है ताकि वह उत्तर दे सके। इसके विपरीत दुश्मन आक्रामक है। भारत स्वाभाविक रूप से शांतिप्रिय देश है, लेकिन हजारों सालों से विदेशियों ने हम पर हमले किये हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने अपनी किताब विंग्स ऑफ फायर में लिखा है - बीते 3000 साल के इतिहास में दुनिया भर से लोग आए और उन्होंने हम पर आक्रमण किये, हमारी जमीन और हमारे दिमाग पर कब्जा किया। यूनानी, पुर्तगाली, ब्रिटिश, फ्रांसीसी, डच सभी आए और सभी ने लूटा और जो कुछ हमारा था, ले गए। हमने ऐसा किसी दूसरे देश के साथ नहीं किया। हमने किसी पर आक्रमण नहीं किया। हमने उनकी भूमि, उनकी संस्कृति, उनके इतिहास पर कब्जा नहीं किया और न ही अपनी जीवनशैली उन पर थोपी।
क्या हम भीरू लोगों के देश हैं ? हमने विदेशी आक्रांताओं का स्वागत किया, उनके साथ रहे हैं और उनके साथ खाते - पीते रहे हैं। ऐसे में यह आश्चर्यजनक नहीं कि भारत के बौद्धिकों, नौकरशाहों, पत्रकारों और कूटनीतिज्ञों का एक वर्ग पाकिस्तान से शान्ति वार्ता करने की सलाह सरकार को देता रहता है, यह जानते हुए भी कि शत्रु की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। किसी देश का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व अपने सामाजिक सोच – विचार के हिसाब से फैसला लेता है। भारत में सोच – विचार का माहौल मूलतः पत्रकारों और टिप्पणीकारों की बातों से बनता है, लेकिन दिल्ली में कई ऐसे हैं जोउसी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के एजेंडे के मन मुताबिक काम करते देखते हैं जो आतंकी संगठनों को पालती - पोसती है। अपने कार्यकाल के पहले साल में नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तानी सीमा पर सही नीति अपनाई थी। पाकिस्तानी की ओर से की जाने वाली हर गोलाबारी का भारत ने कड़ा जवाब दिया, पाकिस्तानी आश्चर्यचकित थे। सीमा पर शान्ति दिखने लगी थी, लेकिन दिल्ली में पाकिस्तानी लॉबी यह समझाने में सफल रही कि मोदी को पाकिस्तान का दौरा करना चाहिए। 25 दिसंबर को जब मोदी लाहौर दौरे के बाद में ध्यान रखूंगा कि अफगानिस्तान में भारतीय ठिकानों पर या भारत के अन्दर आतंकी हमला होता है या नहीं ?