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AbhimanyuVishwakarma
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खादी ग्रामोधोग हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह उघोग जहां एक ओर हमारी राष्ट्रीयता की पुनीत भावनाओं से जूड़ा है और ऱाष्ट्रपिता महात्मा गाधी के ग्राम विकास की मौलिक बिचार धारा को प्रतिबिम्बित करता है, वहीं गावों के लाखों निर्धन तथा निर्बल तथा निर्धन वर्गों के लोगों के लिए रोजगार का सर्वाधिक लोकप्रिय तथा सरल माध्यम है। खादी ग्रामोधोग का व्यापक प्रसार कर तथा सम्पूर्ण ग्रामीण अंचल में इसका जाल बिछाकर बहुत बड़ी सीमा तक वर्तमान बेरोजगारी की समस्या का समाधान किया जा सकता है नगरवासियों को भी इससे रोजगार का लाभ दिलाया जा सकता है। इस दृष्टि से इस उधोग को आज अधिकाधिक बढ़ावा देने का आवश्यकता है। प्रदेश में खादी ग्रामोधोग के कार्यों को सातवीं योजना अवधि में कम से कम दुगुना करने के लिए अविलम्ब ठोस कारगर उपाय किये जाने चाहिए। इस सन्दर्भ में यह भी आवश्यक है कि कादी ग्रामोधोग के व्यापक प्रसार के साथ-साथ इसके उत्पादन में गुणात्मक सुधार लाकर इसे अधिक लोकप्रिय बनाया जाय। खादी से जुड़े मूलभूत उद्देश्यों में बिना विचलित हुए खादी उधोग का आधुनिकीकरण और विकास, इसकी प्रोन्नति तथी समृद्धि के लिए आवश्यक है। इसके साथ ही प्रचलित विपणन प्रवृतियों, वर्तमान जन-आकांक्षाओं और उपभोक्ताओं की पसन्द को भी द्यान में रखना होगा। चर्खें के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। शासन खादी ग्रामोधोग को प्रोत्साहित करने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रहा है, इसके विकास व प्रोन्ति के लिए एक व्यवहारिक योजना बनाई जा रही है, जिसको सातवीं योजना अऴधिक में कार्यान्वित किया जायेगा। आशा है इसके लिए खादी उधोग के क्षेत्र में अनुभवी लोग तता इसके विशेषज्ञ भी अपना योगदान देंगे। शासन इस उधोग को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बनाने का लिए कृतसंकल्प है और इसके मार्ग में आने वाली बादाओं तथा समस्याओं का निदान करने की दिशा में पूर्ण प्रयासरत है।