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AbhishekDubey1071896
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वोटिंग मशीन विशुद्ध रूप से कम्प्यूटर विज्ञान के सिद्धान्त पर आधारित, कम्प्यूटर जैसी एक मशीन है । इस मशीन के उपयोग के पक्ष में तरह-तरह की दलीलें दी जाती हैं । मुख्य दलीलें हैं - इस मशीन के उपयोग से सरकारी कामकाज में आसानी हो जाती है, सुदूरवर्ती गाँवों के मतदाता भी बिना किसी बाहरी दबाव के अपनी इच्छा से स्वतंत्रतापूर्वक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं, यह मशीन बहुत बड़ी संख्या में मत पत्रों के छापने और उनको सुरक्षित रखने की समस्या का हल है, इस मशीन के प्रयोग से अस्पष्ट मत-चिन्ह अथवा एक से अधिक उम्मीदवारों के नाम के आगे चिन्ह अंकित नहीं हो सकते, इससे कागज और स्याही की बचत होगी, मतदाता की अंगुली पर लगाई जाने वाली स्याही सम्बन्धी गड़बड़ी नहीं होगी, जाली मतपत्रों का प्रयोग असम्भव होगा। चुनाव प्रक्रिया सरल हो जाएगी, मतदान केन्द्रों पर होने वाली हेराफेरी रोकी जा सकती है, मतदान केन्द्रों तथा मतपेटियों पर होने वाले कब्जे से मुक्ति मिल जाएगी ।
वोटिंग मशीन की नियंत्रण इकाई चुनाव अधिकारी के पास होती है । मतदान इकाई को चुनाव कक्ष के अन्दर रखा जाता है । स्मृति भण्डार (मेमोरी) इसी मतदान इकाई में होता है, जिसमें प्रोग्रामर उम्मीदवारों से सम्बन्धित विवरण भर देता है । मशीन पर उम्मीदवार और चुनाव चिन्ह के सामने एक पुश-बटन लगा होता है, बटन को दबाते ही मशीन का लैम्प प्रकाश देने लगता है, जो मत पड़ने का सूचक है । मशीन को अपनी पूर्व स्थिति में लाने तक यह बटन पुनः नहीं बदल सकता । इस तरह इसका कोई दुरुपयोग नहीं कर सकता । मतदान इकाई को पूर्व स्थिति में लाने का काम नियंत्रण कक्ष में बैठा चुनाव अधिकारी, नियंत्रण इकाई के पेनल का बटन दबाकर करता है । बटन दबाने और मतदान इकाई के लैम्प जलने की सूचना नियंत्रण इकाई में एक अलार्म द्वारा चुनाव अधिकार को मिल जाती है, परन्तु इससे यह आभास नहीं होता है की मत किसके पक्ष में पड़ा है । किसी मतदाता द्वारा दो बटन एक साथ दबाने से कोई रिकॉर्ड नहीं होता है । इस प्रकार एक बार में एक ही मत रिकॉर्ड होता है । मतदाता की समाप्ति पर मशीन सीलबन्द कर गणना केन्द्रों पर भेज दी जाती है । गणना केन्द्रों में मात्र बटन दबाने से अलग-अलग उम्मीदवारों के पड़े मत और कुल मतों की संख्या ज्ञात की जा सकती है ।
अब वोटिंग मशीन द्वारा चुनावों में बेईमानी और घपलेबाजी का उद्गम हो गया है । प्रोग्रामर अथवा कोई भी जानकार व्यक्ति अवांछित कार्यक्रम (प्रोग्राम) वोटिंग मशीन में फीड कर सकता है । इसमें चोरी से इस प्रकार के निर्देश भरे जा सकते हैं कि सभी वोट एक ही उम्मीदवार को अथवा केवल एक विशिष्ट राजनीतिक दल के उम्मीदवारों को मिला अथवा हर दूसरा या तीसरा वोट विशेष उम्मीदवार को मिले आदि । यह प्रोग्राम फीड करने वाले की योग्यता पर निर्भर करती है । चुनाव कर्मियों की मिली-भगत से यह कार्य किया जा सकता है ।