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harry26
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राज्य की बुनियादी जिन चार तत्वों पर टिकी होती है, उनमें जनसंख्या एक अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण तत्व है। जनसंख्या का भी अगर वर्गीकरण किया जाए तो कई अलग-अलग वर्ग तैयार होते हैं। वर्तमान भारतीय समाज के संदर्भ में अगर जनसंख्या का वर्गीकरण करें तो पुरुष, महिला एवं बच्चे तीन बहुसंख्यक वर्ग नजर आते हैं। इन तीन वर्गों में महिला एवं बाल विकास को सरकार अलग करके विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए स्वतंत्रता के बाद सी ही प्रयासरत रही है। इसमें को ई शक नहीं है कि बच्चों में देश का भविष्य है तो वहीं महिलाएं समाज के आधे प्रतिनिधित्व का पूरा प्रतिबिम्ब हैं। इन दोनों का विकास किए बिना राज्य के विकास की किसी भी परिकल्पना को साकार रूप नहीं दिया जा सकता है। आज जब देश में एक पूर्ण बहुमत की एक सरकार है, तो इस बात का मूल्यांकन अनिवार्य हो जाता है कि बाल विकास एवं महिला उत्थान के क्षेत्र में सरकार की नीतियां कितनी कारगर एवं लाभकारी हैं। पिछली सरकारों द्वारा भी महिला एवं बाल विकास को लेकर नीतिगत स्तर पर काम होता रहा है एवं वर्तमान सरकार भी अपनी नीतियों के साथ इस मुद्दे को लेकर आगे बढ़ रही है। अगर देखा जाए तो महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भारत सरकार ने गत एक बर्ष में कई कारगर कदम उठाए हैं। सकूलों में लड़कियों के लिए शौचालय का निर्माण, 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की शुरुआत, 'सुकन्या समृद्धि योजना', 'खोया-पाया' वेबसाइट, जैसी योजनाएं सरकार ने शुरू की हैं।