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ajaykushwaha1156965
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रोजगार व्यक्ति की आधारभूत आवश्यकता है, ईश्वर ने हमें मस्तिष्क और हाथ और पाँव, दिमाग की अनेक शक्तियाँ, दिल और भावना प्रदान की है जिससे कि उनका सदुपयोग किया जा सके और मनुष्य आत्म-सिद्धि प्राप्त कर सके, यदि ऊपर वर्णित शक्तियों को उपयोग करने के लिए हमारे पास अवसर ही नही है तो बहुत सी समस्याएँ खड़ी हो जाती है। प्रथम, हम अपनी शारीरिक औऱ मानसिक आवश्यकताओं की पूर्ती नहीं कर सकते। कार्य की अनुपस्थिति में हमें शरारत करना आयेगा।। इस प्रकार ऐसे समाज में, जिसमें रोजगार की समस्या जटिल है, उसमें निराशा, अपराध व अविकसित व्यक्तित्व होंगे। भारत लगभग इसी प्रकार की परिस्थिति से गुजर रहा है। यहाँ बेरोजगारी की समस्या बड़ी जटिल हो गयी है। हमारे रोजगार कार्यालयों में करोड़ो लोग पंजीकृत है जिनको काम दिया जाना है, इनके अतिरिक्त ऐसे भी व्यक्ति है, और उनकी संख्या भी लाखों में है, जो कि अपने को रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत नहीं करा पाते।