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viveksingh7275
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आजकल हमारे देश एवं प्रदेश में यह फैशन सा चल पड़ा है कि कुछ विशिष्ट लोग, दूसरों के द्वारा पहनाई गयी, सुगन्धित पुष्पों की माला को पहनने के तुरंत बाद ही उतार देते हैं, उन्हें यह सम्मान सूचक माला ऐसी लगती है जैसे किसी ने उनके गले में काला नाग लपेट दिया हो। हमारा प्राचीन साहित्य एवं इतिहास यह स्मरण कराता है कि सुमन माला को निकालने के कारण ही देवासुर संग्राम तक छिड़ गया था जिसमे कंठहार को निकालने के अपराध में देवराज इन्द्र सिंहासन से उतार दिए गए थे। गले में डाली गयी माला की सुगन्ध स्वाभाविक ही नाक में प्रवेश कर जाती है जिससे भीतर समाई हुई दुर्गंध दूर हो जाती है, मन प्रसन्न एवं प्रफुल्लित हो जाता है, रोग-दोष भाग जाते हैं।