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vinitpandey
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किसी देश, राष्ट्र तथा समाज के विकास तथा समृद्धि में पत्रकारिता की अहंभूमिका होती है। उच्च स्तरीय पत्र तथा स्वस्थ पत्रकारिता किसी भी देश को धमनी होती है। जिस प्रकार स्वस्थ शरीर मे धमनियाँ रक्त संचार कर शरीर को स्फूर्ति प्रदान करती है। ऱाष्ट्रीय एकता समाजिक सुधार व प्रगति जैसे कार्यों मे स्वस्थ पत्रकारिता का उललेखनीय महत्व होता है, साहित्य समाज का दर्पण होता है, किन्तु इस कथन का एक पहलू और भी है। जहाँ एक साहित्य समाज का दर्पण होता है, वहीं दूसरी तरफ साहित्य से नये समाज का निर्माण होता है अर्थात् साहित्य किसी देश की समृद्धि, व्यापार तथा सामाजिक व्यवस्थाओँ को नयीं दिशा प्रदान करता है। बिना किसी साहित्य के किसी अच्छे समाज की क्लपाना कोरी क्पलाना ही सिद्ध होगी। अर्थात हमें सदैव समाज के प्रति वफादर रहना चाहिए क्योंकि समाज से निकल जाने के बाद कोई इज्जत नहीं रहती है। भाई होली कब है कब है होली........