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Amit4U
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भारत और चीन सम्बन्धों का निचोड़ यह है कि यद्यपि दोनों देशों ने गत दो दशकों में आर्थिक व कतिपय अन्य क्षेत्रों में सम्बन्धों का तेजी से विस्तार किया है, लेकिन सामरिक मामलों में अविश्वास व तनाव का माहौल कम नहीं हुआ है। जटिल सीमा विवाद के बीच सीमा पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ कम नहीं हुई हैं। भारत के विरोध के बावजूद चीन अरूणाचल प्रदेश के नागरिकों को अब भी नत्थी वीजा जारी कर रहा है। चीन अरूणाचल प्रदेश में भारत के प्रधानमंत्रियों के जाने का विरोध करता रही है। दूसरी तरफ वह अपने कृत्यों से भारत के हिस्से वाले कश्मीर को तो वह विवादास्पद क्षेत्र मानता है वहीं पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से को पाकिस्तान का हिस्सा मानता है। इसका प्रमाण यह है कि अप्रैल 2015 में चीन के राष्टपति की पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों में 48 बिलियन चीनी निवेश की मदद से चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की स्थापना का समझौता किया गया है। इस गलियारे में सड़के, रेल लाइनों के साथ-साथ अन्य सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर होते हुए चीन के पूर्वी झिंगझियांग प्रान्त के शहर काशगर को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को जोड़ेगा। कानूनी दृष्टि से चीन पाक अधिकृत कश्मीर के विवादपस्द क्षेत्र पर इस गलियारे का निर्माण नहीं कर सकता, लेकिन चीन ने भारत के इस विरोध को दरकिनार कर दिया है। चीन-पाक सामरिक गठजोड़ भारत के लिए चिन्ता का विषय है। पाकिस्तान का परमाणु हथियार तथा मिसाइल कार्यक्रम चीन की सहायता से ही चल रहा है तथा दोनों देश एक-दूसरे को हर मौसम दोस्त भी मानते है।