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Amit4U


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बंदर और कचुआ बड़े मित्र थे। कछुआ नदी मे रहता था। बंदर नदी के समीप एक पेड़ पर रहता था। बंदर कछुए को मीठे फल खिलाता था। कुछआ कछुवी को मीठे फल देता था। एक दिन कछुवी ने कछुए से कहा- जिस बंदर के दिए फल इतने मीटे है, उसका दिल कितना मीटा होगा। कछुवी ने बंदर का दिल खाने की जिद की। जब कछुवी नहीं मा्नी तो एक दिन कछुआ बंदर के पास आया वह बोला आओ मित्र आज मैं तुम्हें अपने घर ले चतला हूँ। बंदर राजी हो गया। कछुए ने बंदर को अपनी पीठ पर बैठा लिया और नदी मे चल पड़ा। रास्ते में उसने बंन्दर से कहा। भाई मुझे बड़ा दुख है कि मेरी कछुवी तुम्हारा दिल चाहती है। बंदर खतरा समझ गया। उसने चालाकी से काम लिया उसने कछुए से कहा तुमने पहले क्यों नही कहा मेै तो अपना दिल पेड़े पर ही छोड़ आया हूंँ। आओ वापिस चलों मैं तुम्हे अपना दिल देता हू्ं तुम मुझे पेड़ पर ले चलों मू्र्ख कुछुआ हबंदर को किनारे पर वापिस ले आ.या बंदर उछलकर पेढ़ पर चढ़ गया और प्रकार बदर ने अपनी जान वचायी इमरान खान वरेली शरीफ
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