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vineetmishra
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जीवन का सर्वांगीण विकास सम्यक् मूल्यांकन तथा उसके विकास-क्रम का संतुलित विश्लेषण लिखित परीक्षा के द्वारा क्षात्रों के बौद्धिक विकास व्यक्तित्व मे निहित समग्र कुशलताओं तथा क्षमताओं का यथार्थ मूल्यांकन नहीं हो पाता था। इसलिए शिक्षाशास्त्रियों ने सम्पूर्ण व्यक्तित्व की जाँच के लिए मूल्यांकन परीक्षा पद्धति को अधिक प्रश्रय दिया। इस तरह, मूल्यांकन-प्रक्रिया ‘शिक्षा जगत’ में एक विशेष दायित्व के साथ प्रवेश करती है। इसके अभाव में हमारे समस्त क्रियाकलाप मूल्यहीन बन जाते हैं, क्योंकि इसके द्वारा हमारी असफलताओं का निर्णय, कठिनाइयों आदि का पता लगाया जाता है। शिक्षा-जगत में मूल्यांकन का महत्व बहुत अधिक दिया जो सम्पूर्ण शिक्षा-प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। यह शिक्षा के उद्देश्यों से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैं उसमे न केवल पाठ्य वस्तु की उपलब्धि ही निहित है वरन् अभिवृत्तियों, रुचियों, आदर्शों, विचार-विमर्श के ढंग कार्य आदतों तथा वैयक्तिक एवं सामाजिक अनुकूलन भी निहित है।