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vineetmishra
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बालक का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक नैतिक एवं भावनात्मक आदि सभी गुणों की परीक्षा सम्मिलित होती है। भविष्यवाणी शिक्षकों, शिक्षणविधियों, पाठ्य वस्तु एवं पाठ्यक्रम होती है। इकाई के रूप में क्रमायोजित शिक्षा जगत- में आधुनिक प्रयोग कर विधि परम्परावादी शिक्षण के विरुद्ध प्रतिक्रिया है। इकाइयों की रचना में भौतिक वातावरण, सामाजिक जीवन-कला विज्ञान, संस्कृति आदि के विविध महत्वपूर्ण पदों पर आधार लेना चाहिए जिससे सुगमता एवं प्रभावपूर्णता लक्ष्य, रूचि, योग्यता, मनोवृत्ति, सौन्दर्यनुभूति, आदर्श व्यवहार के रूप में हो सकता है। बालक के बहुमुखी वैयक्तिक विभिन्नताओं रूचियों एवं योग्यताओं वा अभिगमनानुभावों वा उद्देश्य निर्धारण करने योजना पारगमिता और सामाजिकता परिश्थितियों द्योतक हों काल्पनिक न हों। सम्बन्धी ज्ञानात्मक पाठों अथवा व्याकरणिक पाठों में इकाई योजना सरलतापूर्वक व्यवहार हो सकती है, क्योंकि विभिन्न भाषा-तत्वों अथवा व्याकरणिक अवयवों के आधार पर इकाइयों का गठन सरल हो सके।