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vineetmishra
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निर्देशन व्यक्ति को बुद्धिमत्तापूर्ण चयन एवं समायोजन के लिए दी गयी एक प्रकार की सहायता है। यह इस सिद्धान्त पर आधारित है कि सभी व्यक्तिओं को अपना जीवन व्यतीत करने की शैली को चुनने का अधिकार है।यह चयन दूसरों के अधिकार क्षेत्र में अवरोध उत्पन्न करने वाला नहीं होना चाहिए। चयन की यह योग्यता न तो जन्मजात होती है और न ही मूलप्रवत्तिजन्य। इस योग्यता का भी अन्य योग्यताओं के साथ विकास होता है। अतः शिक्षा की एक महत्वपूर्ण भूमिका, चयन योग्यता के विकास में व्यक्ति को सक्षम बनाना है। शिक्षाविद् भी निर्देशन को शिक्षा के एक अभिन्न अंग के रूप में स्वीकार करते हैं और शैक्षिक कार्यों में इसे महत्वपूर्ण मानते हैं। निर्देशन के अन्तर्गत व्यक्ति के चयनों को निरूपित नहीं किया जाता वरन् इसे मात्र सहायता प्रदान की जाती है। “निर्देशन व्यक्ति के दृष्टिकोण एवं उसके बाद के व्यवहार को प्रभावित करने के उद्देश्य से स्थापित, गतिशील आपसी सम्बन्धों के एक प्रक्रम है”।