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Rahu
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धर्म की दृष्टि से भारत विशेष रूप से हतभाग्य रहा है। स्वतन्त्रता आन्दोलन के समय अग्रेजों ने भारत में अपना शासन बनाए रखने के लिए धार्मिक भेद भावों का विशेष लाभ उठाया। अंग्रेजी शासनकाल में साम्प्रदायिक भावनाओं को राजनीतिक रूप मिलने का एक कारण यहाँ प्रतिनिधि या निर्वाचित सस्थाओं की स्थापना थी। अंग्रेज लोग प्रतिनिधित्व का अर्थ अलग अलग समूहों, वर्गौ, हितों, क्षेत्रों, संस्थाओं और सम्प्रदायों का प्रतिनिधित्व समझते थे। उन्होंने भारत के अनेक सम्प्रदायों और जातियों की समस्या को इनके स्वाभाविक् अस्तित्व बोध और एक-दूसरे की आपस की वैमनस्यता की समस्या समझा और उसका उपाय अलग अलग धार्मिक समूहों को पृथक् पृथक् प्रतिनिधित्व देने में समझा। भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या हरित शासन की समकालिक है। अंग्रेजों ने भारत में फूट डालो और शासन करो की नीति अपनायी ताकि वे हिन्दुओं और मुसलमानों को लड़ाते रहें और भारत पर अपनी हुकूमत चलाते रहें।