words per minute

20

singhshyam


00:00

Speed

ाँच बरस बाद - शरद के धवल नक्षत्र नील गगन में झलमला रहे थे। चंद्र की उज्ज्वल विजय पर अंतरिक्ष में शरदलक्ष्मी ने आशीर्वाद के फूलों और खीलों को बिखेर दिया। चंपा के एक उच्चसौध पर बैठी हुई तरूणी चंपा दीपक जला रही थी। बड़े यत्न से अभ्र्रक की मंजुषा में दीप धर कर उसने अपनी सुकुमार ऊँगलियों से डोरी खींची। वह दीपाधार ऊपर चढ़ने लगा। भोली-भाली आँखें उसे ऊपर चढ़ते हर्ष से देख रही थीं। डोरी धीरे-धीरे खींची गई। चंपा की कामना थी कि उसका आकाशदीप नक्षत्रों से हिलमिल जाए किंतु वैसा होना असंभव था। उसने आशाभरी आँखें फिरा लीं। सामने जल-राशि का रजत शृंगार था। वरूण बालिकाओं के लिए लहरों से हीरे और नीलम की क्रीड़ा शैल-मालाएँ बन रही थीं - और वे मायाविनी छलनाएँ - अपनी हँसी का कलनाद छोड़कर छिप जाती थीं। दूर-दूर से धीवरों का वंशी-झनकार उनके संगीत-सा मुखरित होता था। चंपा ने देखा कि तरल संकुल जलराशि में उसके कंदील का प्रतिबिंब अस्तव्यस्त था! वह अपनी पूर्णता के लिए सैंकड़ों चक्कर काटता था। वह अनमनी होकर उठ खड़ी हुई। किसी को पास देखकर पुकारा
words per minute
0
wpm
accuracy
0%
Text Practice - Time 330 - English

words per minute