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Krishan5659
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सलमान मलिक द्वारा जारी-
भारतीय प्रधानमंत्री की छह दिनों में पांच देशों की यात्रा में हर देश के दौरे का अपना महत्व था, लेकिन यह स्पष्ट ही है कि अमेरिका की यात्रा पर सभी की निगाह थी। शायद इसलिए और भी, क्योंकि वह दो साल के अंदर चौथी बीर अमेरिका जा रहे थे और इस दौरान उन्हें अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करना था। इस संबोधन के दौरान उन्होंने सचमुच समां बांध दिया नि:सन्देह वह एक दुर्लभ दृश्य था जब उसी अमेरिकी संसद में सांसद नरेंद्र मोदी के सम्मान के बार-बार खड़े होकर करतल ध्वनि कर रहे थे जिसने कुछ बरस पहले उनकी अमेरिका यात्रा पर रोक लगाई थी। उनका भाषण केवल प्रभावशाली ही नहीं था, बल्कि उसमें नीतिगत स्पष्टता और भारत की वैश्विक भूनिका की भावी रूपरेखा भी थी। उन्होंने जिस तरह अमेरिका को अनिवार्य सहयोगी बताया और अतीत के असमंजस से बाहर निकलने की जरूरत जताई उससे यही स्पष्ट हुआ कि वह उस दौर से आगे बढ़ना चाहते हैं जब अमेरिका को भारत के स्वाभाविक सहयोगी की संज्ञा दी गई थी। वैसे तो यह पहले भी कहा जा चुका है कि समृद्ध और सबल भारत अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया के हित में है, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री ने यह बात कहीं अधिक जोरदार तरीके से कही।