words per minute
11
ShobhitamSaxena
00:00
Speed
बहुत समय पहले की बात है बारांबकी जिले में एक युवक जो कि जाति से लोध था रहता था वह बिल्कुल ही अनपढ़ और नकारा था उसके जीवन में किसी भी तरह का को भी नियम कानून नही था जब मन होता खाता जब मन होता सो जाता था लोग उसे एक दम नाकारा मानते थे कोई उसे काम नही देता था बड़ी मुश्किल से उसे एक सेठ ने गाय चराने का काम सौंपा वह गायों को लेकर जंगल की ओर जा रहा था कि रास्ते में उसे एक ऋषि मिले जिनसे युवक ने अपना दुख सुनाया और अपने दुख को काटने का उपाय पुछा तो ऋषि ने कहा बेटा तुम्हारे दुख का एक मात्र कारण है तुम्हारे जीवन में नियम का अभाव होना। तुम कोई एक नियम बना लो और उसे नित्य प्रति किया करो। इसके बाद युवक आगे बढ़ तो उसे जंगल में एक शिव लिंग मिला वह अनपढ़ था उसे पूजा कर्म इत्यादि का बिल्कुल भी बोध नही था। अपनी हालत का जिम्मेदार भगवान को मानकर उसने नित्य शिव को दंडित कारने का नियम बनाया और वह अपनी लाठी से रोज शिवलिंग पर चार लाठियों का प्रहार करने लगा । यह घटनाक्रम वर्षों तक चलता रहा वह बिना भूले रोज लाठी मारने के नियम को पूरा करने के लिए जंगल जाता था साथ में पूरे गाँव की गाय चरता था। सभी उसे भोजन इत्यादि के लिए मासिक शुल्क देने लगे थे। फिर एक बार अचानक उस क्षेत्र में बाढ़ के रूप में दैविय आपदा ने हमला किया। लेकिन युवक के गांव में बाढ़ का पानी नही पहुँचा था किन्तु शिवलिंग वाली जगह बाढ़ के बीचोबीच स्थित थी इस कारण वह गाय चराने नही गया। और साम को जब भोजन पर बैठा तो उससे भोजन का निवाला नहीं लिया गया उसे बैचनी होने लगी वह तुरन्त भोजन से उठ गया मां ने पूछा बेटा कहा जा रहे हो तो उसे कहा मेरा एक जरूरी काम रह गया मैं वही निपटा के आता हूं और अपनी लाठी लिए बड़ी मुश्किलों का समाना करते हुये वह शिवलिंग तक पहुंच गया और जैसे ही चार लाठी का प्रहार शिंवलिंग पर किया तुरन्त भक्त वत्सल भगवान शिव ने आकार स्वरूप में उसे समाने खड़े हुये और बोले – हे युवक मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूँ मांगो क्या वर चाहते हो? युवक डर के मारे थर थर काँपने लगा उसे लगा की उसकी मार से क्रोधित होकर शिव ने दर्शन दिया है वह तुरन्त क्षमा माँगने लगा । तब शिव जी बोले – तुमने बड़ी श्रृद्धा के साथ मेरे स्वरूप को पत्थर के शिवलिंग में विश्वास किया और अपने प्राणों के परवाह न करते हुए भी मुझे दण्डित करने आये मै तुम्हारे विश्वास से बहुत प्रसन्न हूँ माँगो क्या वर चाहिये? तब युवक ने कहा प्रभु मुझे कुछ नही चाहिए बस आपके साथ मेरा नाम जुड़ जाये। बस इतना ही वर चाहता हूँ । शिवजी बोले मेरा यह शिवलिंग कलान्तर मे लोधेश्वर धाम के नाम से जाना जायेगा। इतना कह कर शिव अन्तर्धान हो गये। आज भी यह मन्दिर उत्तर प्रदेश प्रान्त के बारांबकी जिले के महादेवा नामक स्थान पर स्थित है जहां पर सावन मास मे हर साल लाखो भक्त काँवरिया बनकर आते है और बाबा शिव को आशीष प्राप्त करते है।
इस कहानी में क्या सच्चाई है मै नही जानता किन्तु इतना अवश्य कहूंगा कि जिन्हे जीवन में कुछ प्राप्त करना हो उनके लिए जीवन में नियम का बहुत अधिक महत्व देना चाहिए क्योकिं बिना नियम के संसार की कोई भी वस्तु कोई भी क्रिया कभी सफल नही हो सकती है।
-ऋषभ पाण्डेय (शुक्लागंज उन्नाव-कानपुर)