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ravi7115
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दोस्तो.... आज उत्तर प्रदेश मे एक ऐसा सामाजवाद है जिसका राम मनोहर लोहिया के समाजवादी सपने से कही तालूक नही रखता , बल्की राम मनोहर लोहिया के समाजावादी सपने का चोला पहन कर ये ऐसा समाजवाद का निर्माण किया जा रहा है जिसका मकसद सिर्फ लूटवाद है जहा देखो वही लूटवादी समाजवाद लगा हूआ है। इसी लूटवाद का नमूना उत्तर प्रदेश की सरकारी नौकरी मे जमकर लूटवाद चल रहा है, सभी विभागों मे विज्ञाप्ति निकाल कर जम कर भष्टाचार करना ही इनका असली समाजवाद है आज उत्तर प्रदेश के सभी भर्ती बोर्ड के हाल करीब एक जैसी है विज्ञापन निकाल कर पचवषीय योजना के अनुसार भर्ती करना ....ताकि असली समाजवादी छुट न जाय ।
आज हमारे प्रदेश की हालत ऐसी हो गया है कि एक होनहार छात्र अपने भविष्य़ को लेकर इतना चिंतित है कि नौकरी कैसे मिले? हमारे प्रदेश मे भर्ती के लिए होने वाले परीक्षा की हालत ऐसी है कि परीक्षा के पहले ही पर्चे बाजार से लेकर शोसल साइटो तक मिल जा रहा है और इसी परीक्षा से नौकरी मे चयन हो रहा है ये पेपर कैसे बाजार व शोसल साइटो पर आया इसका सरकार व भर्ती बोर्ड को कोई लेना देना नही है । कई बार छात्र के हो हल्ला से कुछ सेन्टर पर दूबारा परीक्षा करा ईतीश्री कर लेते है भला इस परीक्षा से किसका चयन हो रहा है ये तो कुछ चन्द ही लोग बता पायेगे कि वे पढ़ के या जुगाड़ लगा कर ।
परीक्षा इस सरकार का दिखावा मात्र है इन के लिए समाजवादी परीक्षा ही चयन का मानक है जिसमे कुछ योग्यता है जैसे - कुछ विशेष जाति हो, कुछ विशेष स्थान से हो, कुछ विशेष लोगो से जुड़े हो, कुछ विशेष चीजे रखते हो जो जिसके सहायता से चयन करा सके, आदि