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totoraj1010
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तीन दिनों के बाद 29 जनवरी की शाम को 'बीटिंग द रिट्रीट' नामक समापन समारोह होता है। पुराने जमाने में सूर्यास्त होने से पहले राष्ट्रध्वज को सम्मानपूर्वक उतारने तथा सैनिकों को बैरकों में लौट जाने का सन्देश देने के लिए बैन्डपथक रास्तों पर विशिष्ट धुन बजाया करते थे। इस अवसर पर इस पुरानी सैनिक परम्परा को अनोखे ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। तीनों सैन्यदलों के कुल 20 अथवा अधिक बैन्ड पथक बनाए जाते हैं, जो धुनें बजाते चलते है, किन्तु इतने से ही समापन समारोह का अन्त नहीं हो जाता। महात्मा गांधी के प्रिय करुण गीत 'एबाइड विद मी' की सीधी-सादी धुन बजाई जाती है। गीत का अन्त होने के साथ-साथ वाधों का स्वर भी शान्त होता जाता है। मार्मिक गीत के अन्तिम स्वर की टेक पर बिगुल की धारदार धुन उभरती है और उसकी समाप्ति के साथ ही गणतन्त्र दिवस समारोह का समापन हो जाता है।