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totoraj1010
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महात्मा गाँधी के विचार, दर्शन और सन्देश वर्तमान के लिए बहुत सार्थक हैं। हमें कहना चाहिए कि वे ही तो एक धनात्मक तत्व हैं जो कि आधुनिक सभ्यता को सर्वनाश से बचा सकते हैं। स्थायी मान्यताएँ जैसे स्व से पूर्व सेवा, संचय से पूर्व त्याग और दूसरों के लिए चिन्ता, बहुत तेजी से समाप्त होती जा रही है और उनका स्थान स्वार्थपरता, लालच, अवसरवाद, धोखा, चालाकी और झूठ के द्वारा लिया जा रहा है। इन सबने द्वन्दों और संघर्षों को जन्म दिया है और सहिष्णुता तथा मानव प्रेम के उच्च आदर्श कमजोर पड़ते जा रहे हैं। इस भयावह तस्वीर को पूर्ण करने के लिए शस्त्रीकरण के लिए अनन्त होड़ हुई है। युद्ध के विनाशकारी शस्त्र मानव जाति के अस्तित्व के लिए ही खतरा बने हुए हैं। बड़े पैमाने पर विनाश की नई और नई तकनीकियों का विकास किया जा रहा है। कानून की सभी प्रणालियों, करारों, सन्धियों एवं गठबन्धनों को मानवीय मेल-जोल और शान्ति को स्थापित करने में सफलता नहीं मिली है।