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vishal13
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स्वप्न सब देखते हैं, कल्पनाएँ सबके मन में जन्म लेती हैं; परन्तु ऐसे व्यक्ति बहुत कम होते हैं, जो उन्हें साकार करने का प्रयत्न करते हैं और उनसे भी कम संख्या होती है उन व्यक्तियों की जो अपने स्वप्नों को सचमुच साकार कर पाते हैं।
स्वप्नों की बात करना क्या केवल स्वप्नलोक की वस्तु है? नही, यदि स्वप्न न होते, उनको देखने वालोें ने उन्हें यथार्थ जीवन से सम्बंद्ध न माना होता, तो हम आज सभ्यता के वर्तमान शिखर पर कदापि नहीं होते। इन स्वप्नों की बदौलत ही हम आज अन्तरिक्ष की खबरें लाने में समर्थ हैं, चन्द्रलोक की सैर करने में सक्षम हैं, विश्व ब्रह्माण्ड की माप करने का दम भरते हैं आदि। कौन जानता है? कल्पनाशील कलाकार ही पत्थर के सामान्य टुकड़े में कलाकृति की कल्पना करने में समर्थ होता है। न मालूम कितने व्यक्तियों ने पक्षियों को आकाश में उन्मुक्त भाव से उड़ते देखा होगा और सोचा होगा कि वे भी आकाश में पक्षियों की भाँति विचरण कर सकते हैं, परन्तु अपनी इन कल्पनाओं को साकार करने का संकल्प किया राइट बन्धुओं ने और वे हमको हवाई जहाज दे गए।
जेम्स वॉट और एडीसन ने स्वप्न देखें और उन्हें साकार करने क प्रयत्न करते हुए उन्होंने हमे विज्ञान के विभिन्न उपकरण प्रदान कर दिए। इस दुनिया से सभ्यता एवं उन्नति के नाम पर हम जो कुछ देखते हैं, वह सब स्वप्नद्रष्टाओं के स्वप्नों का योगफल ही होता है। विश्व के इतिहास में से स्वप्नद्रष्टाओं के वृतान्त निकाल दीजिए, फिर देखिए के इतिहास में क्या पढ़ने योग्य रह जाता है?