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ankur1139026
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रिश्वत के प्रकरण में सामान्यतः दो पक्ष होते है। एक वह पक्ष जो रिश्वत देता है और दूसरा वह जो रिश्वत लेता है। रिश्वत लेना व देना दोनों ही आपराधिक कृत्य माने जाते हैं, परन्तु इस सम्बन्ध में प्रायः यह विवाद की बात मानी जाती है कि रिश्वत के कार्य से सम्बन्धित दोनों पक्षों में कौन इस कृत्य के लिए उत्तरदायी है।
इस सम्बन्द में अपना कोई निश्चित विचार बनाने से पहले हमें दोनों पक्षों का परीक्षण कर लेना चाहिए।
जहाँ तक विचार के इस पक्ष का सम्बन्ध है कि रिश्वत के लेन-देन सम्बन्धी कृत्य कारित किए जाने के लिए उत्तरदायित्व रिश्वत लेने वाले पक्ष का होता है। इस पक्ष के पक्षधारों का कहना है कि रिश्वत लेने वाले उन परिस्थितियों की उत्पत्ति के लिए उत्तरदायी होते हैं जिनमें रिश्वत का लेन-देन अनिवार्य हो जाता है तथा वह रिश्वत देने वालों की विवशता बन जाती है। उदाहरणार्थ- जब किसी व्यक्ति को किसी सरकारी कार्यालय से अपना कार्य जैसे कोई परमिट या लाइसेन्स लेना, मकान का नक्शा स्वीकृत कराना, पानी या बिजली का संयोजन प्राप्त करना आदि कराना होता है और जब अपनी ओर से सब कार्य नियमानुसार पूरा करने के बाद भी वह यह देखता है कि सम्बन्धित फाइल टस से मस नहीं होती तो उसे विवश होकर रिश्वत देनी पड़ती है अनेक कार्यालयों में तो स्थिति ऐसी तक है पूरे कार्यालय का रिश्वत का सारा धन एक ही स्थान पर ले लिया जाता है।