words per minute
6
suttapatel
00:00
Speed
माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद्भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता। वह घोड़ा बहुत ही सुंदर और बलवान था। उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था। बाबा भारती उसे सुल्तान कहकर पुकारते थे, अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और देख-देखकर प्रसन्न होते थे। उन्होंने अपना सब कुछ छोड़ दिया था, यहाँ तक कि उन्हें नगर के जीवन से भी घृणा थी। अब गाँव से बाहर एक छोटे से मंदिर में रहते और भगवान का भजन करते थे। मैं सुल्तान के बिना नहीं रह सकूँगा उन्हें ऐसी ही भ्रांति सी हो गई थी। वे उसकी चाल पर लट्टू थे। जब तक संध्या के समय सुल्तान पर चढ़कर आठ दस मील का चक्कर न लगा लेते उन्हें चैन नहीं आता। खड्गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे। होते होते सुल्तान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची। उसका ह्रदय उसे देखने के लिए अधीर हो उठा। वह एक दिन दोपहर के समय बाबा भारती के पास पहुँचा और नमस्कार करके बैठ गया। बाबा भारती ने पूछा खड्गसिंह क्या हाल हैं, कहो इधर कैसे आ गए। सुल्तान की चाह खींच लाई। विचित्र जानवर है। देखोगे तो प्रसन्न हो जाओगे। मैंने भी बड़ी प्रशंसा सुनी है उसकी चाल तुम्हारा मन मोह लेती है। कहते हैं कि देखने में बड़ा सुंदर है। बहुत दिनों से अभिलाषा थी, आज उपस्थित हो सका हूँ। बाबा भारती और खड्गसिंह अस्तबल में पहुँचे। बाबा ने घोड़ा घमंड़ से दिखाया। खड्गसिंह ने घोड़ा बड़े आश्चर्य से देखा।