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jagritiwin
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इस पर संत ने फिर से कहा देख भाई मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि अगर तू इन लोगो के साथ शांतिपूर्वक रहना स्वीकार करता है तो ये लोग भी तेरे साथ बेहद अच्छा बर्ताव करेंगे और साथ ही तेरे लिए खाने की भी व्यवस्था कर देंगे। क्या तू ये प्रतिज्ञा करता है? इस पर भेड़िये ने अपना सिर पूरी तरह झुका लिया और संत के हाथ पर अपना पंजा रख दिया । संत उसे शहर के बीचो बीच ले गये और सबके सामने एक बार फिर भेड़िये से ये बात कही तो भेड़िये ने पहले की तरह संत के हाथ पर हाथ रख दिया और उसके बाद वो भेड़िया दो साल तक उस शहर में रहा और उसने किसी को कोई हानी नहीं पहुंचाई इस पर उसके मरने पर भी लोगों को बहुत दुःख हुआ लेकिन फिर भी वो लोग हैरान थे कि ऐसा खूंखार जानवर ने अपनी प्रवृति किस तरह बदल ली। उसे जिसने बदल दिया उसके अंदर एक चीज़ थी ये किसी ने नहीं जाना। ये संत फ्रांस्वा का प्रेम पूर्ण बर्ताव था जिसने उसे बदल दिया और प्रेम की महिमा इसी को तो कहते है। कहानी से हमे सीख मिलती है कि किसी भी तरह के बुरे इन्सान जो अपने स्वभावत: बुरा होता है उसे हम अपने अच्छे बर्ताव से बदल सकते है अगर हम ऐसा करना चाहें तो क्योंकि वो लोग जो समाज के विरोध में सोचते है उन्हें समाज से बाहर तिरस्कृत करने से कोई समस्या हल नहीं हो जाती है जरुरत है तो बस उनसे और अधिक प्रेमपूर्वक बर्ताव की जिस से हम उनकी जिन्दगी बदल सकते है।