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RiteshChandra
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खादी ग्रामोग्योग हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह उद्योग जहां एक ओर हमारी राष्ट्रीयता की पुनीत भावनाओं से जुड़ा है और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम विकास की मौलिक विचार धारा को प्रतिबिम्बित करता है, वहीं गांवों के लाखों निर्धन तथा निर्बल वर्गों के लोगों के लिए रोजगार का सर्वाधिक लोकप्रिय तथा सरल माध्यम है।
खादी ग्रामोद्योग का व्यापक प्रसार कर तथा सम्पूर्ण अंचल में इसका जाल बिछाकर बहुत बड़ी समी तक वर्तमान बेरोजगारी की समस्या का समाधान किया जा सकता है नगरवासियों को भी इससे रोजगार का लाभ दिलाया जा सकता है। इस दृष्टि से इस उद्योग को आज अधिकाधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता है। प्रदेश में खादी ग्रामोद्योग के कार्यों को सातवीं योजना अवधि में कम से कम दुगुना करने के लिए अविलम्ब ठोस तथा कारगतर उपाय किये जाने चाहिए।
इस संदर्भ में यह भी आवश्यक है कि खादी ग्रामोद्योग के व्यापक प्रसार के साथ-साथ इसके उत्पादन में गुणआत्मक सुधार लाकर इसे अधिक लोकप्रिय बनाया जाय। खादी से जुड़े मूलभूत उद्देश्यों से बिना विचलित हुए खादी उद्योग का आधुनिकीकरण और विकास, इसकी प्रोन्नति तथा समृद्धि के लिए आवश्यक है। इसके साथ ही प्रचलित विपणन प्रवृत्तियों, वर्तमान जन-आकांक्षाओं और उपभोक्ताओं की पसन्द को भी ध्यान में रखना होगा। चर्खें के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
शासन खादी ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रहा है। इसके विकास व प्रोन्नति के लिए एक व्यवहारिक योजना बनाई जा रही है, जिसको सातवीं योजना अवधि में कार्यान्वित किया जायेगा। आशा है इसके लिए खादी उद्योग के क्षेत्र में अनुभवी लोग तथा इसेक विशेषज्ञ भी अपना योगदान देंगे। शासन इस उद्योग को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बनाने के लिए कृतसंकल्प है और इसके मार्ग में आने वाली बाधाओं तथा समस्याओं का निदान करने की दिशा में पूर्ण प्रयासरत है।
इसके अतिरिक्त खादी के वस्त्रों को पहनने से व्यक्ति में स्वदेशी की भावना उत्पन्न होती है तथा व्यक्ति को यह स्वाभाविक रूप से अनुभूति होती है कि उसने बेरोजगारी जैसी भईषण समस्या के समाधान हेतु अंशमात्र योगदान दिया है। हमारे देश के अधिकाधिक लोगों में यह भावना यद् उत्पन्न हो जाये तो इससे रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बहुत सहायता मिलेगी तथा विदेशी कपड़ों के लिए जो बहुमूल्य विदेशी मुद्रा चुकानी पड़ती है, उससे बचा जा सकता है।