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user733469
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घंमड को दूषित विचार का माना जाता है। यह ठीक है पर अहंकार का एक दूसरा पक्ष भी है। इंसान का परिचय उसके अहंकार से मिलता है। इंसानियत के कारण ही दुनिया में विविधता, सजीवता, सरलता पैदा होती है। इंसानियत के अभाव में जीवन नीरस हो जाता है। इंसानियत के अभाव में मनुष्य चाहे कुछ क्यों न बन जाए, वह सब बेकार है क्योंकि इंसानियत को मजा ही कुछ और होता है। अच्छी इंसानियत पुष्प की सुगंध के समान होता है। संपर्क में आने वाले हर इंसान पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इंसानियत किसे कहेंगे? उसका आदर्श उत्तर हो सकता है कि इंसान की बोलचाल, रहन-सहन एवं अन्य लोगों से किए जाने वाले वाणी व्यवहार से जो अर्क टपकता है, उसी से इंसान के भाव का पता चलता है।