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JitendraKumarNamdeo
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भारत का प्राचीनतम खेल तीरंदाजी आज सरकार की दोषपूर्ण खेल नीतियों के दुर्भाग्यपूर्ण शिकंजे में जकड़कर पूरी तरह उपेक्षित है। यही एक ऐसा खेल बचा है जिसमें भारत द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ कर दिखाने की थोड़ी बहुत उम्मीद बची हैं सरकार और खेल संघों की उपेक्षापूर्ण नीति के चलते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तो भारत की किसी भी खेल में कोई अच्छी साख नहीं रह गई है। यदि यही स्थिति रही तो धीरे-धीरे लगभग हर खेल पतन की गर्त में समा जायेगा, इन्हीं उपेक्षाओं और खेलों में कुंठित राजनीति के समावेश ने तो भारत को विश्व स्तर पर कहीं का नहीं छोड़ा है। लगभग प्रत्येक खेल में विश्व स्तर पर हम कहीं नहीं टिक पाते हैं। भारत में सर्वाधिक बढ़ावा यदि किसी खेल को दिया जाता है तो वह है क्रिकेट परन्तु क्रिकेट संघों की गंदी आंतरिक राजनीति ने इसका भी बेड़ा गर्क कर दिया है. इसी तरह किसी जमाने में विश्व की सर्वश्रेष्ठ समझी जाने वाली भारतीय हाकी भी आज पतन के उस कगार पर है जहाँ से उसकी वापसी लगभग असंभव ही दिखाई पड़ती है। इसी तरह प्राचीन भारत के महानतम धनुर्धरों श्रीराम, अर्जुन, कर्ण आदि कि महान परम्परा का निर्वाह करने वाला आज एक भी तीरंदाज भारत में नहीं है। जब किसी भी प्रतियोगिता में भारतीय तीरंदाजी टीम हिस्सा लेती है तो उस समय महाभारत के महानतम योद्धा अर्जुन की याद अवश्य सताती है। काश यदि अर्जुन जैसा कोई होता तो तीरंदाजी में भारत का कोई सानी नहीं होता। हाल ही में दिल्ली में सम्पन्न हुई चार देशों की तीरंदाजी प्रतियोगिता में भारत ने टीम चैम्पियनशिप तो अवश्य जीती परन्तु व्यक्तिगत स्पर्धाओं में चीन का तीरंदाजी में वर्चस्व रहा। किसी भी प्रतियोगिता में टीम चैम्पियनशिप से ज्यादा महत्व व्यक्तिगत स्पर्धाओं का ही होता है। इस प्रतियोगिता में मेजबान भारत सहित भूटान, चीन, यूगोस्लाविया व सिंगापुर ने हिस्सा लिया था। भारत और चीन को छोड़कर अन्य देशों के तीरंदाज प्रभावशाली प्रदर्शन न कर सकें। कुछ समय पूर्व तक तीरंदाजी में चीन काफी पिछड़ा हुआ था परन्तु उनके तीरंदाजों ने आशा के विपरीत अच्छा प्रदर्शन करते हुए इस खेल में भी अपना दबदबा कायम कर लिया। भारत ने गत वर्ष एशिया कप, विश्वकप और ओलम्पिक में दक्षिण कोरिया के तीरंदाजों को पछाड़ कर एक सनसनी फैलायी थी और एशिया कप प्रतियोगिता में टीम चैम्पियनशिप पर कब्जा करके चीन की चुनौतियों को तोड़ते हुए अपना दबदबा कायम किया था।