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RajeshSolanki
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यदि 'आज' को समझना चाहते हो तो पहले 'कल' की खोज करो। अमेरिकी उपन्यासकार पर्ल एस.बक ने कहीं पर यह लिखा था। बीसीसीआई ने सीके नायडू लाइवटाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए जिन तीन खिलाडि़यों को चुना है उसे देखकर ऐसा ही लगता है। बीसीसीआई ने दो पूर्व लेगस्पिनर पद्माकर शिवलालकर और राजेंद्र गोयल को पुरुष वर्ग में और भारत की पहली महिला क्रिकेट कप्तान शांता रंगास्वामी को अवार्ड के लिएचुना है। इन्हें 8 मार्च को अवार्ड दिया जाएगा। 74 वर्षीय राजिंदर गोयल और 76 वर्षीय शिवलाकर को क्रिकेट छोड़े हुए 30 साल हो चुके हैं। महिला क्रिकेटर शांता रंगास्वामी ने भी लगभग ढाई दशक पहले क्रिकेट से संन्यास लिया था। शिवालकर और गोयल को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का भले ही मौका न मिला हो लेकिन घरेलू क्रिकेट के ये सुपरस्टार थे। इनमें विशन सिंह बेदी या दिलीप दोषी जैसी स्पिन क्षमता थी लेकिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बेदी के लगातार सफल होने के कारण इन्हें मौका नहीं मिल सका। हां, विदेशी टीमें जब भारत यात्रा पर आई तब इन्होंने अपनी क्षेत्रीय टीम की ओर से खेलते हुए अपनी स्पिन कला का जौहर जरुर दिखाया। देखा जाए तो भारत में विश्वप्रसिद्ध स्पिनरों की कभी कमी नहीं रही। स्पिनरों में वीनू मंकड़, जस्सू पटेल, सुभाष गुप्ते, गुलाम अहमद, इरापल्ली प्रसन्ना, सलीम दुर्रानी, रवि शास्त्री, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह और वर्तमान में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा ने विश्वख्याति अर्जित की है। भारत के अलावा अन्य किसी देश में इतने सारे विश्वस्तरीय स्पिनर अब तक नहीं हुए हैं। राजेन्द्र गोयल और शिवालकर की स्पिन प्रतिभा को लेकर कभी भी किसी को कोई संदेह नहीं रहा है। लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर दोनों ही गेंदबाजों के मुरीद हैं। उनका कहना है कि दोनों अगर एक ही समय में किसी और देश से खेलते तो दोनों ही प्लेइंग इलेवन में होते। शिवालकर तो गावसकर के साथ मुंबई टीम में थे लेकिन राजेन्द्र गोयल विरोधी टीम हरियाणा में होने के कारण उनके खिलाफ बल्लेबाजी करनी पड़ती थी। गावस्कर ने स्पिन क्षमता को नजदीक से देखा है इसलिए वे कह रहे है कि ये दोनों समान रुप से प्रतिभा के धनी हैं। गावसकर ने अपनी किताब 'आइडल' में इनका जिक्र किया है। गावसकर लिखते हैं कि बेदी केटीम में होने के कारण इन्हें मौका नहीं मिल सका। प्रथम क्रिकेट में तीनों के आंकड़े जबर्दस्त हैं।