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ThakurShab
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बहुत पुरानी बात है, एक गांव था, प्रेमनगर जहां के निवासी बहुत प्रेमी हृदय के थे, प्रेमनगर जैसा कि नाम से ज्ञात होता है, वहुत अच्छा गांव था, सभी गांव वासी मिल जुल कर रहते थे, सभी त्योहार मिल जुल कर मनाते थे, किसी विषम परिस्थिति में सभी साथ रहते थे। गांव के सभी लोग अपने प्रधान/मुखिया की बात मानते थे। मुखिया ने जो कह दिया वही गांव में होता था। मुखिया गांव वालों के लिए सब कुछ था, सभी लोग अपने प्यारे से गांव में खुशी थे। एक सरकारी आदेश आया कि गांव की जमीन पर एक विशाल बॉध का निर्माण किया जाना है, तो सभी गांव वालों को यह गांव खाली करना होगा, गांव वालो यह बात सुनी तो बेचारे बहुत दु:खी हुये, सभी ने मुखिया से कहा कि क्या हमें सच में अपना गांव छोड़ के जाना पड़ेगा। मुखिया ने कहा नही, मेरे होते इस गांव को कोई खाली नही करवा सकता।
सरकारी काम में दादागिरी नही चलती हम लोगो को सरकार से निवेदन करना होगा कि वह ऐसा न करे, सभी लोग न्यायालय में याचिका लगाने गये, लेकिन याचिका से कुछ नही हुआ होते होते एक दिन आया कि जबरन गांव को खाली करवाने के आदेश सरकार ने दे दिया और कहा कि सभी को अपनी जमीन के हिसाब से पैसे मिल जाऐगे। मुखिया और गांव वाले बहुत परेशान थे। तभी गांव का एक लड़का रामू जो थोड़ा पड़ा लिखा था, वह न्यायालय में गया और न्यायाधीश से रोत हुए वोला कि सर यदि कोई अपके हशते खेलते घर पर बॉध बना दे, तो आपको पैसे दे तो आप अपना घर दे देगे। न्यायाधीश बच्चे की बात सुन कर चौक गये और विचार विमर्श करने के बाद उसकी बात मान ली और गांव पर बॉध बनाने से मना कर दिया, गावं बाले बहुत खुश हुए और रामू की होशियारी की बहुत तारीफ की।