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AnshulShrivastava975
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अयोध्या में 1992 में ढांचा विध्वंस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने मंगलवार को भजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, सांसद विनय कटियार समेत 12 आरोपियों के विरूद्ध आरोप तय कर दीए। इसके साथ ही 25 साल बाद साजिश वाले मामले में केस शुरू हो गया। इससे पहले निचली अदालत और फिर हाई कोर्ट ने इन्हें साजिश के आरोप से मुक्त कर दिया था। मंगलवार को विशेष अदालत ने इन नेताओं के खिलाफ समुदायों के बीच धार्मिक उन्माद फैलाने व वैमनस्यता पैदा करने, अशांति पैदा करने के अलावा धार्मिक उन्माद का वातावरण बनाने का षड्यंत्र रचने का आरोप तय किया। अब इस प्रकरण में बुधवार को गवाही होगी । कोर्ट को रोजाना सुनवाई करते हुए दो साल में फैसला दे देना है। इन 12 आरोपियों के अलावा अन्य आरोपियों के विरुद्ध पूर्व में विशेष अतदालत आरोप तय कर चुकी है। मंगलवार को दोपहर लगभग 12 बजे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, विष्णु हरि डालमिया, साध्वी ऋतंभरा समेत सभी 12 आरोपी विशेष दालत के न्यायधीश सुरेंद्र कुमार यादव के समक्ष हाजिर हुए । इनकी ओर से कहा गया कि प्रकरण में सभी धाराओं में उनकी जमानत हो चुकी है, सिर्फ 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र रचने) में जमानत नहीं हुई है। इसमें भी उन्हें जमानत दी जाए। न्यायाधीश ने 50-50 हजार के मुचलके पर उन्हें रिहा करने का आदेश दे दिया। आडवाणी और जोशी के वकीलों की ओर से एक अन्य अर्जी प्रस्तुत कर कहा गया कि विवादित ढांचा ढहाए जाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है, बल्कि उन्होंने विधवंस को रोकने की कोशिश की थी। लेकिन सीबीआइ ने इसका विरोध किया। कहा कि विवेचना में आरोपियों के शामिल होने के सुबूत मिले हैं। उनकी षड्यंत्र में अहम भूमिका रही है। अयोध्या में ढांचा विध्वंस मामले में पचीस साल बाद अब आरोप तय हुए हैं और दो साल में मुकदमे की सुनवाई पूरी की जानी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल होने की वजह से कल्याण सिंह को फिलहाल कार्यवाही से मुक्त कर रखा है। बुधवार को गवाही होने के साथ ही मुकदमे की प्रक्रिया गति पगड़ लेगी। गौरतलब है कि विवादित ढांचा विध्वंस प्रकरण के मामले में मुख्यत: पहली एफआइआर थानाध्यक्ष रामजन्मभूमि प्रियम्बदा नाथ शुक्ला ने छह दिसम्बर 1992 को दर्ज कराई थी, जबकि दूसरी एफआइआर वरिष्ठ उपनिरीक्षक जीपी तिवारी ने अज्ञात कारसेवकों के विरुद्ध दर्ज कराई थी। इसके अलावा मीडिया एवं अन्य 50 पीड़ित पक्षकारों की ओर से प्रथमिकी दर्ज कराई गई थी। स्थानीय पुलिस द्वारा इस प्रकरण की विवेचना के उपरांत अपराध संख्या 192%92 के आरोपितों अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, उमा भारती एवं साध्वी ऋतम्भरा के विरुद्ध सुनवाई के लिए सरकार के गठन की 16 दिसंबर, 1992 को अधिसूचना जारी की गई।
राजनीतिक संभावनाएं: आडवाणी और जोशी का नाम राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए चल रहा है। अदालती कार्यवाही से उनकी उम्मीदवारी पर कोई कानूनी अड़चन तो नहीं होगी, लेकिन विपक्ष नैतिकता का सवाल जरूर उठाएगा। कानून में महज आरोप तय होने से चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है। अलबत्ता यदि इन दोनों में से कोई राष्ट्रपति चुन लिए जते हैं तो उन्हें पद पर बने रहने के दौरान संवैधानिक संरक्षण जरुर मिल जाएगा।