words per minute
31
dhirendra
00:00
Speed
केरल मे पिछले दिनों जो कुछ भी हुआ वह चर्चा का केन्द्र बना हुआ है कि किस तरह लोग विरोध के चक्कर में हिंसा पर उतारू है खास तौर पर राजनैतिक लोग जो अपने आप को जनता का रखवाला कहते है लेकिन जब बात सत्ता की आती है तो वे लोग हिंसा पर उतारू हो जाते है और तथाकथित सेक्युलर लोग चुप। गांधी के देश में सरेआम एक बेजुबान पर जिस प्रकार जुल्म किया गया वो वाकई में शर्मनाक था भारत के संस्कृति तथा जनभावना के बिल्कुल विपरीत था। एक बछड़े को काटकर शायद वो देश की सबसे बड़ी आबादी को चुनौति देना चाहते है कि अगर उनके मुताबिक नहीं रहोगे तो हम इसी प्रकार तुम लोगो को नीचा दिखाने का प्रयास करते रहेगें।
दरसअल सेक्युलरिज्म का जिस प्रकार दुरूपयोग भारत में देखने को मिलता है उतना ओर कहीं नहीं मिलता। ये लड़ाई सिर्फ विचारधारा की ही नहीं बल्कि अच्छे तथा बुरे, हिंसक तथा अहिंसक लोगों के बीच की है।
समाज और देश की समस्या सिर्फ बुरे लोग ही नहीं बल्कि अच्छे लोग भी है क्योंकि अच्छे लोगों की सबसे बड़ी बुराई है कि वो एक नहीं है जबकि बुरे लोगों की सबसे बड़ी अच्छाई है कि वो एक है, ऐसा शायद इसलिये है क्योंकि बुरे लोगो को समाज में ताने, गाली तिरस्कार मिलता है जिसे वो दूसरो के साथ मिलकर भोगना चाहते है जबकि अच्छे लोगों का समाज मे इज्जत, मान, सम्मान मिलता है जिसे वो अकेला भोगना चाहते है। जय हिन्द।