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AashiSharma1411394
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भारत देश में नदी जल प्रकृति की बहुमूल्य देन है। इस जल का उपयोग न सिर्फ आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है बल्कि देश की बढ़ती हुई जनसंख्या को खाद्य सामग्री की जरुरतों को पूरा करने के लिए जरुरी है। असमान वर्षा के कारण इस जल को एकत्र करने के लिए बांध और जलाशयों का निर्माण भी देश की उन्नति में सहायक सिद्ध होगा।
महोदय आजकल एवं कुछ शताब्दियों से भारतवर्ष की जनता के बीच इलाहाबाद शहर का नाम बड़ी श्रद्धा व लगन के साथ लिया जाता है। इसका कारण है कि वहाँ पर तीर्थराज संगम की महत्ता। इलाहाबाद शहर का नामकरण पहले प्रयाग था जो कि मुगलशासन काल के दौरान इसका नामकरण अल्लाहबाद रखा गया, यही नाम कालान्तर में आगे चलकर इलाहाबाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
महोदय, देश की संसद हो या राज्यों की विधान सभाएं अध्यक्ष या पीठासीन अधिकारी ही सदन की मान मर्यादा का रक्षक माना जाता है। उसका सर्वोपरि दायित्व यह है कि वह शांतिपूर्ण ढ़ग से संदन की कार्यवाही का संचालन करें। बड़े दुख की बात है कि पिछले कुछ समय से सदनों में हमारे ही सदस्यों द्वारा किसी न किसी बाद पर हंगामा खड़ा किया जाता रहा है जिससे कि सदन की कार्यवाही घंटों रुकी रहती है। इस प्रकार जनता के द्वारा टैक्स में वसूला गया मेहनत का पैसा व्यर्थ बरबाद होता रहता है। इस प्रकार के व्यवहार एंव आचरण से निश्चय ही हमारी लोकतंत्रिक संस्थानों की महान क्षति होती है।
महोदय, हमारे देश में सहकारिता जीवन का मुख्य आधार है तथा यह समाज का एक प्रमुख स्तम्भ है जिसके अभाव में जन्म से मृत्यु तक कोई भी कार्य संभव नहीं है। आज के युग में भी सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक तीनों ही पहलुओं में सरकारिता या सहयोग का अपना महत्व है। चूंकि हमारा देश कृषि प्रधान देश है इसलिए आज भी देहात में खेती में मदद करने में, जन्म विवाह, मृत्यु अवसरों पर आपसी सहयोग के अनगिनत उदाहरण आज भी देखे जा सकते हैं। परन्तु वर्तमान समय में सहकारिता का अर्थ ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों में सहकारी समितियों के माध्यम से उनकी आर्थिक उन्नति से ही लगाया जाता है।