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SatishYadav7364
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जीवन में पहली बार किसी नए अथवा जोखिम से भरे काम को बिना डरे और उत्सा ह के साथ करना ही रोमांच है। स्कूल में मेरा पहला दिन मेरे लिए रोमांच था जिसने मुझे कभी न भूलने वाला अनुभव प्रदान किया। मुझे हमेशा वो दिन याद रहता है कि कैसे मैं सुबह को जल्दीप उठने, तरोताजा होने, नहाने, नाश्ताे करेन और स्कूरल जाने के लिए बहुत अधिक उत्साीहित था। मेरी माता जी स्कूदल में मेरे पहले दिन के लिए थोडी सी चिन्तित भी थी। इसका कारण यही था कि मैं थोड़ा शरारती और आलसी था। उन्होंनने मुझे सिखाया कि कैसे सभी चीजों को सही समय पर किया जाता है। रात को मैं अपने कमरे में आया और दरवाजा बंद कर लिया। मुझे आज भी याद है कि मैं पूरी रात सोया नहीं था। मैंने स्कूेल के कपडे, जूते पहनने शुरू कर किए अौर कंधों पर अपना स्कू ल बैग टांग लिया। मैं सोचता रहा कि मैं स्कू ल जाते समय कैस लगूंगा आदि।रात बीती और सुबह हो गई। आसमान में चिडिया के चहचहाने की मधुर ध्वेनि आने लगी। सूरज चमक रहा था और मुझ पर खिड़की से सूर्य का प्रकाश पड़ रहा था। मेरी माता जी कमरे में आई और उन्होंनने मुझे अपनी प्याआरी बोली में उठाने की कोशिश की। तभी मैं अपनी ढकी हुई चादर से बाहर आ गया और अपनी माताजी को चकित कर दिया। मैं स्कूपल बस में बपनी माता जी के साथ स्कूउल गया और अपने मित्रों एवं अध्या पकों से मिला। मुझे मेरी कक्षा अध्याापक कक्षा में ले गईं और मेरी माता जी ने बाहर बगीचे में अन्यध माताओं की तरह इंतजार किया। मैं अपनी कक्षा में बहुत ही शान्तय था, पर मैंने बहुत से बच्चोंय को अपनी माताओं के लिए रोते हुए सुना। जब मेरी कक्षा अध्याेपक का आगमन हुआ तो उन्हों ने दरवाजा बन्दम कर दिया और स्मामर्ट बोर्ड पर हमें कुछ बेहतर रोचक कहानियों के बारे में बताया। यह ही नहीं, हमने कई नयी बातें भी सीखी। इससे सभी खुश हो गए। तब अध्यागपिका ने हमसे हमारे बारे में पूछा और हमें अपना नाम भी बताया उन्होंरने हम से कहा कि हम अच्छेा बच्चेो है और हमें नियमित रूप से अपनी माताओं को याद किए बिना आना पड़ेगा तो वो हमें बहुत ही प्याेर से बोल रही थी और सभी के साथ बहुत अच्छेि से व्य वहार कर रही थी। उन्होंपने हम से कहा कि यदि हम स्कूिल प्रतिदिन आएगें तो वो हमें कहानी सुनाया करेंगी। हम सभी अपनी अपनी माताओं के साथ आ गए।