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Om1407427


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ोई भी मनुष्‍य अपने कर्मो से महान बनता है। ना कि कोई उसे महानता की उपाधी उपहार में देता है। जैसा मनुष्‍य कर्म करेंगा वैसा ही उसका चरित्र निर्मीत होगा और वह समाज में अपना स्‍थान पायेगा अगर मनुष्‍य बुरे कर्म करता है तो वह समाज में उन कर्मो के हिसाब से ही स्‍थान पायेगा, और अगर वह अच्‍छे कर्म करेंगा तो समाज में वह उसके हिसाब से ही स्‍थान पाऐगा एक अच्‍छे मनुष्‍य का आचरण सबको अपनी ओर आकर्षीत करता है, और लोगो को उससे कुछ सीखने की प्ररणा देता है। पर एक गलत आचरण वाले मनुष्‍यो के पास कोई भी जाना पसन्‍द नहीं करेंगा। अच्‍छा काम करना सबसे अच्‍छा बोलना एक उत्‍कृष्‍ठ मनुष्‍य की पहचान होती है, वह आदमी कीसी भी प्रकार से कहीं पर भी उपहास का सामना नहीं करेंगा। क्‍योंकि वह लोगो से जीस प्रकार से बात करेंगा लोग भी उससे उसी प्रकार से व्‍यवहार करेंगा। अगर कीसी दुकानदार का आचरण अच्‍छा होंगा तो वह दुकान या व्‍यवसाय ज्‍यादा दीनो तक टीकाउ रहेंगा परन्‍तु अगर वह अच्‍छी प्रवृत्ति का नहीं होगा तो उसकी दूकान ज्‍यादा दीनों तक नहीं चल पायेंगी। जीवन में प्राचीन सन्‍तो द्वारा दीये गये उपदेश बहोत ही प्रभावशाली सिद्ध होते है जो की हमारे जीवन को एक नई दीशा देते है, और नई प्ररणा देते है जो की हर मुश्किील परिस्‍थीती में हमारा मार्गदर्शन करते है। वेसे गुरू की कहीं बातो का हमें सम्‍मान करना चाहिये की अपमान
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