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nimish
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पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियों में तीन साल की एक बच्ची को गिनती सिखाने का जबरन प्रयास, स्प ष्टत: भारतीय शिक्षा पद्धति की उस तस्वीर को दिखा रहा था जहां शिक्षा के मायने ही दबाव की नीति है। घर से लेकर स्कूल तक रटन्तथ विद्या की इस पद्धति ने भारतीय बच्चोंह को न केवल तनावग्रस्तक कर दिया है बल्कि वैश्विक परिदृश्य में उनकी बौद्धिकता कहीं पिछड़ गई है। अमूमन हर भारतीय अभिभावक यही मानता है कि भरी बैग और ढेर सारा-होमवर्क उनके बच्चोंय को सफल बनाने का पहला पड़ाव है। यही सोच हमारे बच्चों को शारीरिक और मानसिक तौर पर कमजोर बना रही है। अगर किताबी शिक्षा की यह पद्धति वाकई सफल होती तो आज कोई भी भारतीय बच्चार बड़ा होने पर बेरोजगारों की पंक्ति में खड़ा दिखाई नहीं देता। पिछले सात दशकों में भारत की शिक्षा पद्धति से कोई बदलाव नहीं किये गए है, सिवाए इसके कि किसी भी तरह नामांकर स्तदर को बढाया जाए। ड्रॉपआउट के मूद्दे पर भी शिक्षाविद् चिंतिंत दिखाई देते हैं पर सच तो यह है जो बच्चेप कागजों में नामांकित हैं वे भी कथाओं में गायब रहते हैं। सबसे पहला और आवश्यकक कदम 'ज्ञान' देने के लिए रटने की परम्पबरा का त्याेग होना चाहिए। शिक्षा देने के साधन इतने मनोरंजनात्मेक होने चाहिए कि वह बच्चेक के भीतर अधिक से अधिक जानने की जिज्ञासा उत्प न्नए करें। इस संदर्भ में हम फिनलैंड का उदाहरण ले सकते हैं। जहां अंग्रेजी के गाने सिखए जाते हैं। संगीत में रच बस कर बच्चेि शब्दोंे के अर्थ, उच्चाारण और उनका प्रयोग करना सीख जाते हैं। प्रारम्भिक शिक्षा को पूरा करने के बाद वोकेशनल स्कूनल का विकल्पी होता है जहां वे सारे कोर्स होते हैा जो बच्चोंद को आत्मसनिर्भर बनाते हैं। हेयर डिजाइनर, कैफेटेरियां सर्विसेज और मैसन (राजमिस्त्री ) जैसे विषयों में बच्चेि दो साल का कोर्स करते हैं। शिक्षा के चाहे हम किसी भी पहलू की बात करें, उसका मुख्यं उद्देश्यर आत्म विश्वा स को जागृत करना होना और जीविकोपार्जन के लिए सक्षम बनाना होना चाहिए। और इन दोनों ही दृष्टियों में हमारी संपूर्ण शिक्षा व्यषवस्थाा नाकाम रही है। क्याल इन परिस्थितियों में यह बेहतर नहीं होगा कि व्या्वसायिक शिक्षा या कौशल प्रशिक्षण को स्कूतल के पाठयक्रम का हिस्साि बनाया जाए। हर देश की अपनी प्राथमिकताएं एवं आवश्ययकताएं होती हैं और उसी के अनुरूप वहां की शिक्षण व्य वस्थाा का ढांचा होना चाहिए। वर्षों से चली आ रही शिक्षा-पद्ध ति की उपयोगिता के संबंध में चर्चा करने का अब समय आ गया है।