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Ramram1424029


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ुस्लिम संत अबू सईद-बिन-अबुल खैर ने एक बार एक जिज्ञासु से प्रश्‍न किया, हजरत ! सुना है कोई महात्‍मा आकाश में उड़ते हैं, कोई पानी पर चलते हैं, तो कोई एक जगह से दूसरी जगह तक गायब होकर पहुंच जाते है, क्‍या ये वाकई स‍च है? जिज्ञासु के प्रश्‍न को सुनकर अबु सईद बोले, 'मेंढक पानी में तैर सकता है, अबाबील पानी पर चल सकता है और शैतान क्षण भर में दूसरे स्‍थान पर जा सकता है, तो क्‍या ये सभी महात्‍मा हो सकते है। महात्‍मा वो हैं, जिसे खुदा तक पहुंचने के रास्‍ते मालूम हों। जिज्ञासु ने आबू सईद से फिर प्रश्‍न किया, 'मन शांत होने से ही खुदा का दीदार कैसे हो सकता है?' अबू सईद ने उत्‍तर दिया, 'मनुष्‍य और खुदा के बीच प्रकाश या पृथ्‍वी का परदा नही है। परदा है घमंड का, अभिमान का ! जब तक तुम्‍हें अपना ख्‍याल रहेगा तब तक तुम्‍हारा दिल खुदा की तरफ नही पहुंचेगा और जब खुदा की याद में तुम खुदा को भूल जाओगे, तब तुम्‍हारे दिल में खुदा ही खुदा होगा !! कुछ लोगों का जीवन ही हमारी जिंदगी की पाठशाला बन जाती है। कई लोग संपत्ति की वसीयत छोड़ कर जाते है, पर कुछ गुणों, संस्‍कारों, विचारों, भावनाओं की सुदर वसीयत छोड कर जाते हैं। बहुत से लोग वसीयत बनाकर अपनी संपत्ति उपनों को दे जाते है, पर कुछ बिना वसीयत बनाए ही सभी को बहुत कुछ इतना दे जाते हैं कि आने वाली कई पुश्‍तें अगर चाहें तो उनके सहारे अपने जीवन को बेहतरीन बना सकती हैं। हमारे बाद अपनों को जरा-सी भी तकलीफ हो कई लोग इसी व्‍यवस्‍था में दिन-रात लगे ही रहते हैं, पर कुछ यह व्‍यवस्‍था भले करें करें पर जब तक वो होते हैं, किसी को तकलीफ देना तो दूर एेसा करने का सोच भी नहीं सकते हैं, क्‍योंकि यह उनकी फितरत में ही नही होता है।
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