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deekshant


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ौधे के वृक्ष बनने तक हमें सिर्फ धैर्य रखना होता है बल्कि उकसी पूरी देखभाल भी करनी होती है। निश्चित समय पर हमें उसे खाद-पानी देना होता है। एक वृक्ष बनने के बाद ही वह हमें फल-फूल और छाया दे सकता है। यही नियम सफलता के सिद्धांत पर भी लागू होता है। आज हमें सफलता प्राप्‍त करने के लिए कई प्रयास करने होते हैं। केवल कुछ प्रयासों द्वारा सफलता प्राप्‍त नहीं होती। आधे-अधूरे प्रयासों से अधूरी सफलता प्राप्‍त करने वाले को नौसिखिया करार दिया जाता है। जल्‍दबाजी और शार्टकट तरीकों से प्राप्‍त सफलता अस्‍थायी नुकसानदेह भी हो सकती है। पढ़ाई और व्‍यापार में तो ऐसे शार्टकट तरीके व्‍यक्ति का भविष्‍य तबाह कर सकते हैं। सूझबूझ और आत्‍मविश्‍वास के साथ कार्य करने वाला व्‍यक्ति अपने समान क्षेत्र के लोगों के लिए एक आदर्श बन जाता है। अन्‍य व्‍यक्ति भी सफलता के लिए उससे सलह लेते हैं और उसके बातए रास्‍ते पर चलकर सफलता प्राप्‍त करते हैं। सफलता के लिए सार्थक प्रयासों के साथ-साथ व्‍यक्ति में निम्‍न योग्‍यताओं का होना भी जरूरी है। इनसे ही सफलता की बुनियाद मजबूत होती है। व्‍यक्ति के मन में धैर्य का होना भी बेहद जरूरी है, क्‍योंकि सफलता प्राप्‍त करने में काफी समय लगता है और अधीर व्‍यक्ति इस समय को लम्‍बा मानकर कार्य को अधूरा छोड़ देता है जबकि धैर्यवान व्‍यक्ति इस समय का भी सदुपयोग कर लेता है। आज की युवा पीढ़ी भी अधीर होती जा रही है। उसमें धैर्य का अभाव रहता है। आज युवा सफल तो होना चाहते हैं किंतु समय व्‍यर्थ गंवाएं बिना। जल्‍द सफलता प्राप्‍त करने के लिए युवा परिश्रम से जी चुराने लगे हैं जबकि बिना परिश्रम और धैर्य के सफलता नही मिल सकती। यदि हम धैर्य के साथ सफलता के प्रयास करते रहें तो सफलता स्‍वयं हमारे कदम चूमेगी। जल्‍दबाजी में कार्य करेगें तो असफलता ही हाथ लगेगी। बांग्‍लादेश के बारे में कहा जाता है कि यहां न्‍याय के रथ के पहिये धीमे घुमते हैं। यह बात काफी हद तक सही कही जा सकती है क्‍योंकि निचली अदालतों के प्रत्‍येक न्‍यायाधीश पर औसतन 2000 मामलों की सुनवाई और निपटारे का भार है। यह भार इसलिए बढ़ रहा है क्‍योंकि निचली अदालतों में न्‍यायाधीशों के 397 पद रिक्‍त पड़े है। हालांकि बांग्‍लादेश जूडिशियल सर्विस कमीशन ने 207 जजों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की है पर देशभर में लंबित पड़े 27.5 लाख मामलों को निपटाने के लिए ये जज भी कम ही पड़ने वाले हैं। सारी प्रक्रिया गृह मंत्रालय की ओर से धीमी है क्‍योंकि नियुक्तियों के लिए पुलिसिया जांच संबंधी फाइलें ही पुलिस तक नहीं पहुंचाई हैं। गौरतलब है विधि आयोग ने 2014 में लंबित मामलों के भार से बचने के लिए 3000 न्‍यायाधीशों की आवश्‍यकता बताई थी लेकिन इस पर आज तक विचार भी नहीं किया गया। इस किस्‍म की नीतिगत और प्रक्रिया संबंंधी देरी से न्‍याय व्‍यवस्‍था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
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