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vikasmaurya1457153
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मौसम बदल रहा था और हल्की-हल्की ठंड पड़ने लगी थी। इसी बीच न जाने कैसे छोटू बीमार पड गया। मुहल्ले के सारे बच्चों में
उदासी छा गई। सबका दादा और शरारतों की जड छोटू अगर बिस्तर में हो तो दशहरे की चहलपहल का मजा तो वैसे ही कम हो जाता।
ऊपर से अबकी बार मम्मियों को न जाने क्या हो गया था। रमा आंटी ने कहा कि अबकी बार मेले में व्यय करने के लिए बीस रूपए से
ज्यादा नहीं मिलेंगे, तो सारी की सारी मम्मियों ने बीस रूपए ही मेले को रेट बांध दिया। मेला न हुआ, आया का इनाम हो गया। बीस
रूपए ही मेले को रेट बांध दिया। मेला न हुआ, आया का इनाम हो गया। बीस रूपए में भला कहीं मेला देखा जा सकता था, यही सब
सोचते-सो चते हेमंत धीरे-धीरे चूते पहन रहा था कि निचे से कंचू ने पूकारा - हेमंत, हेमंत जल्दी से चौक चलो। हेंमंत और सोनू भागते हुए
नीचे उतरे और जल्दी से मोटर की ओर भागे जहां बैठा हुआ स्टैकू पहले ही उनका इंतजार कर रहा था। पूजा के लिए अबकाश हो गया
था। मामा जी के घर के सामने वाले बाग में हर शाम को तमाशा होता था। हेमंत, कंचू और सोनू इस अवकाश में शाम को मामा जी के
यहां जाते थे, जहां वे ममेरे भाई स्टैकू के साथ तमाशा देखते, घूमते फिरते और मनोरंजन करते। हर बार सबक नए कपडे सिलते और घर
भर में हंगामा मचा रहता। अबकी बार कंचू ने गुलाबी रंग की रेशमी कपड़ा सिलाई थी और ऊंची एडी की चप्पलें खरीदी थीं। आशू और
स्टैकू मिलकर बार-बार उसकी इस अलबेली सजधज के लिए उसे चिढा देते। ऊधम और शरारतों की तो कुछ बात ही मत पूछो। जब सारे
भाई बहन जमा होते तो इतना हल्ला-गुल्ला मचता कि अवकाश की रौनक भी हल्की पड जाती। इस साल भई बच्चों का वही नियम शुरू
हो गया था। शाम को वे लाग शहर में लगी रंगीन बत्तियों की रौनक देखते हुए चौक
पहुंचे और घर में घुसते ही खाने की मेज पर जम गए। मम्मी ने खाने का जबरदस्त इंतजाम किया था। आशू के पसंद की टिक्कियां, कंचू की
पसंद के आलू और स्टैकू की पसंद के चिवडे और मूंगफली की खुशबू घर में भरी थी। रवि की पसंद के सफेद रसगुल्ले मेज पर आए तो सबको
रवि की याद आ गई। रवि, नाश्ता करने आओ, मामी ने जोस से आवाज दी। आया मां, रवि की ावाज सबसे ऊपर वाले कमरे से आई। कंचू ने
चाहा कि रवि ऊपर क्या कर रहा है। मम्मी ने बताया कि उबकी बार नाटक में उसने भाग लिया है, इसलिए वह ऊपर टींकू के साथ नाटक
की तैयारी और अभ्यास में लगा हूआ है। थोडी दैर में पूरा मेकअप लगाए हुए टींकू नीचे उतरा तो सभी उसे देखकर
खिलखिला कर हंस दिए। टींकू ने शरमा कर मुह फेर लिया। हैमंत को नाटक के टिकट क्यों नहीं मिले। रवि ने कहा,
टिकट तो सारे स्टैकू के पास थे। सोनू ने कहा, हम बिना टिकट नाटक देखेंगे।