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umeshsingh1421363
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परिवार का पेट पालने के लिए वह रोजाना गांव-गांव, शहर-शहर जाकर गली-मोहल्ले घूम-घूमकर टोपियां बेचता था और उसमें बचे मुनाफे से अपना जीवनयापल करता था। बड़ी मुश्किल से वह अपनी गाड़ी चला रहा था। एक दिन उसका स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं था। पेट की वजह से उसे रात को ठीक से नींद नहीं आई थी। फिर भीर वह भारी मन से उठा और अपने साथ टोपियों की गठरी और एक छोटी-सी पोटली में खाना लेकर वह शहर की ओर जा रहा था, कि रास्ते में उसे जोंरो की भूख लगी। वह एक घनी छायावाले पेड़ के नीचे बैठा। पोटली खोली और उसने खाया। रात भर ठीक से न सो पाने के कारण उसका मन थोड़ी देर सुस्ताने का हुआ। रात भर ठीक से न सो पाने के कारण उसका मन थोड़ी देर सुस्ताने का हुआ। यह विचार मन में आते ही उसने अपना गमचा बिछाया और उसके पास टोपियों की गठरी रखकर वह आराम करने लगा। थोड़ी देर में उसे नींद लग गई। परिवार का पेट पालने वह आराम करने लगा। थोड़ी ही देर में उसे नींद लग गई। परिवार का पेट पालने लिए वह रोजाना गाव-गांव शहर-शहर जाकर गली-मोहल्ले घूम-घूम टोपियां बेचता था और चला रहा था। एक दिन उसका स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं था। पेट की वजह से उसे गाड़ी चला रहा था। एक दिन उसका स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं था। पेट की वजह से उसे रात को ठीक से नींद नहीं आई थी। फिर वह भारी मन से उठा और अपने साथ टोपियों की गठरी और एक छोटी-सी पोटली में खाना लेकर वह शहर की ओर निकल पड़ा। रोजाना की तरह वह जंगल के रास्ते से शहर की ओर जा रहा, कि रास्ते में उसे जोरों की भूख लगी। वह एक घनी छायावाले पेड़ के नीचे बैठा। पोटली खोली और खाना खाया खाया। रात भर ठीक से न सो पाने के कारण उसका मन थोड़ी मन थोड़ी देर सुस्ताने का हुआ। यह विचार मन में आते ही उसने अपना गमचा बिछाया और उसके पास टोपियों की गठरी रखकर वह आराम करने लगा। थोड़ी ही देर में उसे नींद लग गई। परिवार का पेट पालने के लिए वह रोजाना गांव-गांव, शहर-शहर जाकर गली-मोहल्ले घूम-घूमकर टोपियां बेचता था। और उसमे से अपना जीवनयापन करता था। बड़ी मुश्किल से वह अपनी गाड़ी चला रहा था। एक दिन उसका करते था। एक दिन उसका स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं था। पेट की वजह से उसे रात को ठीक से नींद नहीं आई थी। फिर भी। फिर भी वह भारी मन से उठा और अपने साथ टोपियों की गठरी और एक छोटी-सी पोटली में खाना लेकर वह शहर की ओर निकल पड़ा । रोयाना की तरह जगंल के रास्ते से होकर शहर की जो रहा थ। कि रास्ते में उसे जोरों की भूख लगी। वह एक घनी छायावाले पेड़ के नीचे बैठा। पोटली खोली और खाना खाया। रात में आते ही उसने अपना गमचा बिछाया और उसके पास टोपियों की गठरी रखकर वह आराम करने लगा। थोड़ी ही देर में उसे नींद लग गई। परिवार का पेट पालने के लिए वह रोजाना गांव-गाव, शहर-शहर जाकर गली-मोहलले टोपियां बेचता था और उसमे बचे मुनाफे से अपना जीवनयापन करता था ।