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ManojRawat1418602
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आरसा (अराकान रोहिंग्या मुक्ति सेना या हरकत अल-यक़ीन या दीनी तबलीग) म्यान्मार सरकार के विरूद्ध लड़ता मुस्लिम जिहादी संगठन है जिसे समस्त विश्व के मुस्लिमों का स्वाभाविक प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन प्राप्त है।
लगभग 37000 वर्ग किलोमीटर में फैला अराकान प्रांत अब रेखाइन कहलाता है जो कि केरल से कुछ ही छोटा है और केरल की भॉंति ही लम्बोतर समुद्र तट इसकी भौगोलिक विशेषता है। जैसा कि केरल में भी छिपे रूप में चल रहा है, आतंकवादी संगठन हरकत अल-यक़ीन का उद्देश्य म्यान्मार से इस क्षेत्र को काट कर रेखाइन इस्लामी राष्ट्र की स्थापना है।
रोहिंग्या मुसलमान अपने अन्य बिरादरान की तरह ही इस संगठन का प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन करते हैं और इस कारण ही म्यान्मार द्वार अपनी क्षेत्रीय सम्प्रभुता एवं अखण्डता को अक्षुण्ण रखने हेतु इस आतंकवादी संगठन के विरूद्ध की जा रही कार्यवाही में पिट रहे हैं। इस आतंकवादी संगठन के नेतृत्व में रोहिंग्या मुसलमानों ने वहॉं के बौद्ध निवासियों पर भयंकर अमानवीय अत्याचार किय हैं और किये जा रहे हैं।
एक रोचक तथ्य यह है कि नीचतम निर्धनता के चंगुल में फँसे ये मुसलमान अपने बांग्लादेशी मजहबियों की भाँति ही हिंदुओं के विरूद्ध जिहाद से नहीं चूकते।
इस्लाम का रूख इन्हें स्पष्ट है और ये मजहबी आदेश का पालन करते हुये वहॉं जो भी थोड़े हिंदू बचे हुये हैं, उनके समूल नाश में लगे हुये हैं अर्थात अपने गले फॉंसी लगी है किन्तु तब भी काफिर हिंदुओं के विरूद्ध जिहादी हिंसा में लिप्त हैं।
एक उदाहरण पर्याप्त है। गत 25 अगस्त को सुनियोजित ढंग से घात लगा कर रोहिंग्या मुसलमानों ने म्यान्मार सेना की सीमा चौकियों और पुलिस पर आक्रमण किया, साथ ही हिंदु गॉंवों को भी नहीं छोड़ा। रात के अंधेरे में इन मुसलमानों ने रेखाइन प्रांत के मौग्डा क्षेत्र के गॉंवों पर आक्रमण किया और गॉंवों को घेर कर वहॉं 86 हिंदुओं की गला रेत कर और चाकू मार कर हत्या कर दी। फकीरा बाजार, रिक्तपुरा और चिकोनछारी गॉवों को आग लगा लगभग 200 परिवारों को गृहहीन कर दिया। अब वे लोग भी बांग्लादेश में शरण लिये हुये हैं।
मुसलमानों और बौद्धोंं के इस संघर्ष को लेकर भारत के जो कथित प्रगतिशील आतंकी मुसलमानों के लिये न्यायालय से लेकर विश्वविद्यालयों तक प्रदर्शन और समर्थन के भावनात्मक दबाव बनाने में लगे हुये हैं, वे वहॉं के हिंदुओं का नाम तक नहीं लेते।
यह घटनाक्रम सीख है कि यदि मुस्लिम जिहाद पर नियंत्रण नहीं किया गया तो कल केरल की स्थिति भी काश्मीर और रेखाइन जैसी हो सकती है और यह भी कि वैश्विक मंच पर हिंदुओं की पीड़ा को उठाने वाला कोई नहीं है।