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ManjeetMaan1266340
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इजरायल मिसाल है स्वाभिमान की, आत्मसम्मान की और आत्मविश्वास की, चारों तरफ दुश्मन देशों से घिरे होने और न के बराबर प्राकृतिक संसाधन के बावजूद इस देश ने अपनी अलग पहचान कायम की है। इजरायल की खूबियों-खामियों से रुबरु करा रहे हैं, हाल में वहां का दौरा कर लौटे एक भारतीय कखग
यहां महिलाएं भी सेना में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मन से लड़ती हैं। बेहद खूबसूरत दिखने वालीं ये महिला सैनिक इतनी मजबूत हैं कि सन 2000 में नियम बदलकर महिलाओं और पुरुषों की यूनिटें आपस में मिला दी गईं। हम बात कर रहे हैं इजरायल की, जो दुनिया के उन मुट्ठी भर देशों में से है, जहां महिलाओं के लिए भी सैन्य सेवा अनिवार्य है। यहां कुल सैनिकों में एक-तिहाई और अधिकारी लेवल पर करीब आधी महिलाएं हैं। महिला सैनिकों को भी पुरुषों के बराबर कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें भी हर तरह के हथियार चलाने और किसी भी हालात से निपटने के लिए इतना मजबूत बनाया जाता है कि वे हर मौके पर खुद को साबित कर सकें। शायद आपको ऐसी महिला ब्रिगेड दुनिया में कहीं देखने को न मिले क्योंकि ये जितनी खूबसूरत दिखती हैं, उतनी ही बहादुर और मजबूत भी हैं। यहां अनिवार्य सैन्य सेवा से शादीशुदा महिलाओं, मांओं और इस्राइली-अरब महिलाओं को छूट है। वैसे, कड़ी जिंदगी के बावजूद यहां अक्सर महिला सैनिकों के यौन उत्पीड़न की शिकायतें सामने आती हैं। आंकड़े बताते हैं कि सेना में काम करने वाली 20% महिलाएं यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं।
इजरायल सरकार की मुख्य प्रवक्ता शैली एशकोली के मुताबिक पहले महिला सैनिकों को हमेशा फ्रंट से दूर बैक ऑफिस के काम पर लगाया जाता था लेकिन 1967 में अरब-इस्राइल युद्ध में एक महिला अफसर ने इस नियम को तोड़ा और वह जॉर्डन के मोर्चे पर चली गईं। वहां उन्होंने जिस तरह जोश के साथ पुरुष साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लोहा लिया, उसका जिक्र आज तक किया जाता है। हालांकि उन्होंने चूंकि सेना के नियमों की अनदेखी की थी इसलिए उन्हें चार हफ्ते की सजा भुगतनी पड़ी। आधिकारिक रूप से 2006 में दूसरे लेबनान युद्ध के दौरान महिलाओं ने पहली बार लड़ाई में हिस्सा लिया।