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JayhindYadav
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टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए किए जाने वाले उपायों में लागत की दृष्टि से सबसे किफायती है और मृत्युदर तथा टीकों के निवारण योग्य बीमारियों की संख्या कम करने में काफी हद तक मददगार हैं। दुनियाभर से चेचक का उन्मूलन और भारत से पोलियों, यॉज और जच्चा एवं नवजात शिशु संबंधी टेटनस की समाप्ति, जैसी सफलताएं संचार रोगों के अभिशाप से मुक्ति में टीकाकरण की भूमिका हो दर्शाती है। तीव्र विकास और शहरीकरण की प्रवृत्ति को देखते हुए भारत के लिए टीके अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। तीव्र विकास का संबंध क्षेत्रों के भीतर प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही के साथ भी हैं जिसकी परिणति रोगकारकों (प्रतिरोधी प्रजातियों सहित) के एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने के रूप में होती है, नतीजनत संचारी रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। शहरीकरण एक घटक है, लेकिन कुछ राज्य पहले से ही जैपनीज एंसेफलाइटिस जैसे कुछ संचारी रोगों के अधिक प्रसार के जोखिम की समस्या से जूझ रहे हैं। टीकाकरण पर ध्यान केंन्द्रित करना यह सुनिश्चित करने के हमारे प्रयास का भी हिस्सा है कि हम पोलियो से मुक्ति की स्थिति बनाए रखें और देश के प्रत्येक दूरदराज के कोने में प्रत्येक बच्चे तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचाएं।
आज हम पोलियोमुक्त और एमएनटीई-मुक्त भारत की जो स्थिति देख रहे हैं, वह सिर्फ वैक्सीन की बदौलत संभव हुई है और उसमें इस बात का भी योगदान है कि प्रत्येक बच्चे को दवा पिलाई जाए और अब हम उन व्यस्कों को भी कवर कर रहे हैं, जिन्हे इस खुराक की आवश्यकता हो इस सफलता है।